सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव 2026 को लेकर लंबे समय से चल रहे कयासों और भ्रम की स्थिति पर अब पूरी तरह विराम लग गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि साल 2026 का चुनाव न केवल मल्टी पोस्ट ईवीएम (EVM) के जरिए होगा, बल्कि ग्राम पंचायतों और कचहरियों में आरक्षण की स्थिति भी नए सिरे से निर्धारित की जाएगी।
सोशल मीडिया पर फैले भ्रम को आयोग ने किया दूर
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर पंचायत चुनाव की अवधि, बैलेट पेपर के इस्तेमाल और पुराने आरक्षण को लेकर कई तरह की भ्रामक खबरें चल रही थीं। आयोग के संयुक्त निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया कि 2021 के चुनाव के बाद प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण जनवरी 2022 में हुआ था। नियमों के मुताबिक, कार्यकाल समाप्त होने से पहले यानी दिसंबर 2026 तक चुनावी प्रक्रिया हर हाल में संपन्न करा ली जाएगी।
नए सिरे से क्यों तय होगा आरक्षण?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल सीटों के आरक्षण को लेकर था। आयोग ने बताया कि बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धाराओं (13, 38, 65 और 91) के अनुसार, हर दो क्रमिक चुनावों के बाद आरक्षण का रोटेशन यानी नए सिरे से निर्धारण अनिवार्य है। आखिरी बार आरक्षण का निर्धारण वर्ष 2016 में किया गया था।
इसी आधार पर 2016 और 2021 के दो चुनाव संपन्न हो चुके हैं।
अब नियमानुसार, 2026 के चुनाव से पहले सभी पदों (मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, समिति और जिला परिषद सदस्य) के लिए आरक्षण का कार्य नए सिरे से किया जाएगा। इससे कई मौजूदा आरक्षित सीटें सामान्य हो सकती हैं और सामान्य सीटें आरक्षित श्रेणी में जा सकती हैं।
ईवीएम या बैलेट पेपर?
आयोग ने साफ किया है कि राज्य सरकार ने नीतिगत निर्णय लिया है कि आगामी चुनाव मल्टी पोस्ट ईवीएम के माध्यम से ही होंगे। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और मतगणना में तेजी होगी।
इस घोषणा के बाद अब उन भावी उम्मीदवारों में हलचल तेज हो गई है जो पुराने आरक्षण के भरोसे अपनी तैयारी कर रहे थे। निर्वाचन आयोग ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे समय रहते आरक्षण रोटेशन की प्रक्रिया को पूरा करें ताकि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें।