सिटी पोस्ट लाइव
बिहार पुलिस की छवि सुधारने के लिए भले ही आला अधिकारी लगातार सख्त कदम उठा रहे हों, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ताजा मामला दरभंगा जिले के लहेरियासराय थाने से सामने आया है, जहां एक दारोगा द्वारा चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate) के सत्यापन के नाम पर खुलेआम रिश्वत लेने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। इस वीडियो ने न केवल जिला पुलिस, बल्कि पूरे पुलिस महकमे की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विजिलेंस और मुख्यालय की सख्ती के बावजूद ‘नजराना’ जारी
हैरानी की बात यह है कि लहेरियासराय थाना उस क्षेत्र में स्थित है, जहाँ प्रमंडलीय आयुक्त, डीआईजी, जिलाधिकारी (DM), एसएसपी (SSP) और न्यायालय जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक और न्यायिक दफ्तर मौजूद हैं। इतने संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले इलाके के थाने में इस तरह की घटना होना शासन-प्रशासन के इकबाल पर करारा तमाचा माना जा रहा है।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक दारोगा थाने के बरामदे में बैठकर अपना विभागीय काम निपटा रहे हैं। इसी बीच, एक युवक आता है और अपने पर्स से रुपये निकालकर दारोगा जी के हाथ में थमा देता है। वीडियो की प्रामाणिकता तब और पुख्ता हो जाती है जब युवक थाने से बाहर निकलने के बाद कैमरे पर बेबाकी से स्वीकार करता है कि उसने अपने चरित्र प्रमाण पत्र के पुलिस वेरिफिकेशन के लिए 500 रुपये दिए हैं। युवक ने अपना नाम और पता भी सार्वजनिक किया है, जिससे जांच की आंच अब सीधे संबंधित अधिकारी तक पहुँच गई है।
एसएसपी की सख्ती और भ्रष्टाचार का ‘सिस्टम’
वर्तमान में बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। हाल के दिनों में लापरवाही और रिश्वतखोरी के आरोप में दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर निलंबन और प्राथमिकी (FIR) की गाज गिर चुकी है। बावजूद इसके, ₹500 जैसी मामूली रकम के लिए अपनी वर्दी और विभाग की इज्जत दांव पर लगाना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार सिस्टम में कितनी गहराई तक जड़े जमा चुका है।
जांच और कार्रवाई का आश्वासन
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में अफरा-तफरी का माहौल है। दरभंगा एसएसपी ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए कहा है कि वायरल वीडियो की गहनता से जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में दोष सिद्ध होने पर आरोपी पुलिस पदाधिकारी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अब आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह जांच किसी अंजाम तक पहुँचेगी या फिर पुरानी फाइलों की तरह इसे भी दबा दिया जाएगा।