गया नगर निगम के वार्ड संख्या 34 की पार्षद शीला देवी इन दिनों खुद के जीवित होने का सबूत देने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। प्रखंड कार्यालय के अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण एक ‘जीवित’ जनप्रतिनिधि को दस्तावेजों में ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है।
मामला कैसे खुला?
शीला देवी अपने पति के निधन के बाद से नियमित रूप से विधवा पेंशन का लाभ ले रही थीं। हाल ही में जब उनके बैंक खाते में पेंशन की राशि आनी बंद हो गई, तो वह इसकी जानकारी लेने प्रखंड कार्यालय पहुँचीं। वहाँ उन्हें बताया गया कि पेंशन जारी रखने के लिए KYC कराना होगा। जब उन्होंने पोर्टल चेक करवाया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पेंशन बंद होने का कारण दर्ज था— “जांच के दौरान लाभुक मृत पाया गया।”
पार्षद और उनके प्रतिनिधियों का कड़ा विरोध:
शीला देवी (वार्ड पार्षद): उन्होंने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा, “यह अधिकारियों की लापरवाही का चरम है। बिना किसी जमीनी जांच के घर बैठे रिपोर्ट बना दी गई। ऐसे दोषी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
ओम यादव (पार्षद प्रतिनिधि): उन्होंने भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए आरोप लगाया कि, “जब एक मौजूदा पार्षद को मृत घोषित किया जा सकता है, तो आम जनता का क्या हाल होगा? यह जीवित लोगों को मृत दिखाकर सरकारी राशि के गबन का एक बड़ा खेल हो सकता है।”
व्यवस्था पर सवाल:
यह घटना दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) में कितनी बड़ी खामियां हैं। फिलहाल, शीला देवी ने उच्च अधिकारियों को इस मामले की लिखित जानकारी दी है और सुधार की मांग कर रही हैं।