- बिहार आर्थिक सर्वेक्षण जनता को किया गया समर्पित
सिटी पोस्ट लाइव
- बिहार की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय प्रगति
- विकास दर के साथ प्रति व्यक्ति आय में भी बढ़ोतरी
- राज्य सरकार का बजटीय व्यय और पूंजीगत निवेश
- राजस्व और कर संग्रह में वृद्धि
- कृषि और औद्योगिक विकास
- यातायात और अधोसंरचना विकास
- डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस में सुधार
- ऊर्जा क्षेत्र में सुधार
- महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन
- 19.4% वार्षिक दर से बढ़ा सरकारी व्यय
- जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण
- विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है बिहार
पटना। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य की आर्थिक स्थिति और विकास दर को जनता के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिहार आर्थिक रूप से लगातार आगे बढ़ रहा है और सरकार की नीतियों से समग्र विकास हो रहा है।
बिहार की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय प्रगति
बिहार की अर्थव्यवस्था बीते वर्षों में उल्लेखनीय रूप से विस्तारित हुई है। वर्ष 2011-12 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 2.47 लाख करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में बढ़कर 8.54 लाख करोड़ रुपये हो गया, यानी 3.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई।
2023-24 के लिए बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वर्तमान मूल्य पर 8,54,429 करोड़ रुपये और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 4,64,540 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह संकेत करता है कि बिहार आर्थिक मोर्चे पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विकास दर के साथ प्रति व्यक्ति आय में भी बढ़ोतरी
राज्य की अर्थव्यवस्था में वर्ष 2023-24 के दौरान वर्तमान मूल्य पर 14.5% और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 9.2% की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा बिहार की आर्थिक नीतियों और संरचनात्मक सुधारों की सफलता को दर्शाता है।
राज्य में प्रति व्यक्ति आय में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2022-23 में प्रति व्यक्ति आय वर्तमान मूल्य पर 59,244 रुपये थी, जो 2023-24 में बढ़कर 66,828 रुपये हो गई। वहीं, 2011-12 के स्थिर मूल्य पर यह 33,763 रुपये से बढ़कर 36,333 रुपये हो गई।
राज्य सरकार का बजटीय व्यय और पूंजीगत निवेश
वित्तीय वर्ष 2023-24 में बिहार सरकार का कुल व्यय 2.52 लाख करोड़ रुपये था, जिसे 2024-25 में बढ़ाकर 2.79 लाख करोड़ रुपये करने का अनुमान है। विकास योजनाओं पर सरकार का ध्यान केंद्रित है, जिसके चलते कुल बजट का 66.8% यानी 1.69 लाख करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च किया गया।
वर्ष 2023-24 में पूंजीगत व्यय 36,453 करोड़ रुपये रहा, जो 2022-23 के 31,520 करोड़ रुपये की तुलना में अधिक है। बिहार सरकार द्वारा किए गए कुल व्यय में पूंजीगत खर्च का हिस्सा 2019-20 में 14% था, जो 2023-24 में बढ़कर 24% हो गया।
राजस्व और कर संग्रह में वृद्धि
राज्य सरकार का कर राजस्व वर्ष 2023-24 में 1,61,965 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो राज्य की राजस्व प्राप्तियों का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत बन गया। कुल प्राप्तियों में कर राजस्व का हिस्सा 2019-20 में 75.3% था, जो 2023-24 में बढ़कर 83.8% हो गया।
कृषि और औद्योगिक विकास
राज्य में कृषि उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023-24 में चावल का उत्पादन 21% और गेहूं का उत्पादन 10.7% बढ़ा। इसके अलावा, बिहार में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) को सितंबर 2024 तक कुल 75,293.76 करोड़ रुपये के 3,752 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
यातायात और अधोसंरचना विकास
राज्य सरकार सड़क और अधोसंरचना विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। वर्ष 2005 से 2025 के बीच ग्रामीण इलाकों में संपर्क पथ का विस्तार कर पक्की सड़कों की कुल लंबाई 835 किमी से बढ़ाकर 1.17 लाख किमी कर दी गई है। इसके अलावा, नए एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण राज्य के यातायात नेटवर्क को और मजबूत बनाएगा।
डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस में सुधार
बिहार सरकार द्वारा डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहलें की गई हैं, जैसे –
- सीसीटीएनएस (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) – जिससे अपराध और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता आई।
- सीएफएमएस (Comprehensive Financial Management System) – सरकारी वित्तीय लेनदेन को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया।
- ई-चालान प्रणाली – जिससे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर ऑनलाइन चालान की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया गया।
ऊर्जा क्षेत्र में सुधार
बिहार में ऊर्जा खपत में भी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2012-13 में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत 134 किलोवाट आवर थी, जो 2023-24 में बढ़कर 363 किलोवाट आवर हो गई। इसके अलावा, तकनीकी और वाणिज्यिक (AT & C) नुकसान 45% से घटकर 21.7% रह गया।
महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन
बिहार सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की हैं। सितंबर 2024 तक कुल 1,063.5 हजार स्वयं सहायता समूह गठित किए गए, जिनमें 46.9 हजार करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया।
19.4% वार्षिक दर से बढ़ा सरकारी व्यय
पिछले 18 वर्षों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च में कई गुना वृद्धि हुई है।
- सामाजिक सेवाओं पर व्यय 13 गुना बढ़ाया गया।
- स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट 13 गुना बढ़ा।
- शिक्षा पर सरकारी खर्च 10 गुना बढ़ाया गया।
इसके अलावा, बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बिहार में बाल कल्याण बजट की शुरुआत हुई, जिससे वर्ष 2016-23 के बीच बच्चों पर होने वाला सरकारी व्यय 19.4% वार्षिक दर से बढ़ा।
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण
बिहार सरकार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हरित बजट और जल-जीवन-हरियाली मिशन जैसी योजनाओं के तहत पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं।
विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है बिहार
बिहार सरकार द्वारा प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 राज्य की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास, अधोसंरचना सुधार, कृषि क्षेत्र की वृद्धि और सामाजिक कल्याण नीतियों की एक समग्र तस्वीर प्रस्तुत करता है। सरकार की नीतियों के चलते बिहार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है, जिससे राज्य की जनता को समृद्धि और बेहतर जीवन स्तर मिल सकेगा।