BJP के हिंदुत्व के अजेंडे पर भारी पड़ सकता है तेजस्वी यादव के आरक्षण का मुद्दा.

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सिटी पोस्ट लाइव : तेजस्वी यादव को हलके में लेना एनडीए के लिए महंगा सौदा साबित हो सकता है.तेजस्वी यादव आरक्षण, सरकारी नौकरी और माई-बहिन योजना और युवा नेत्रित्व को अपना सबसे बड़ा मुदद बनाकर आगे बढ़ रहे हैं. ये चारों  मुद्दे  बिहार की अधिकांश जनमानस को प्रभावित कर सकता है.आरक्षण का  मुद्दा महागठबंधन लालू यादव यादव पहले भी सफलतापूर्वक आजमा चुके हैं.अब तेजस्वी यादव ने भी इसको हथियार बनाने का ठान लिया है. राजनीति के जानकार कहते हैं कि पटना आरजेडी ऑफिस के सामने आरक्षण के मुद्दे को लेकर राजद कार्यकर्ताओं के साथ उनका धरना देना सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम ना समझा जाए, यह उनकी लंबी प्लानिंग है और बिहार में फिर एक बार आरक्षण का मुद्दा गर्म होने जा रहा है.

 राजनीति के जानकार इसके पीछे की वजह महागठबंधन के सामने मजबूत पिच पर खड़े एनडीए की पॉलिटिकल प्लानिंग के काट के तौर पर देख रहे हैं. दरअसल, तेजस्वी यादव ने बिहार में आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि बिहार सरकार के कारण अनुसूचित जाति और जनजाति, पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग के युवाओं को नौकरी का नुकसान हो रहा है. उन्होंने प्रदेश की नीतीश सरकार और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को ‘आरक्षण चोर’ कहकर संबोधित किया है.दरअसल, तेजस्वी यादव ने जिस मुद्दे को उठाया है वह अगर क्लिक कर गया तो निश्चित तौर पर पूरा सियासी लाभ वह ले जाएंगे.

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उन्होंने नीतीश सरकार और केंद्र सरकार को ‘आरक्षण चोर’ की संज्ञा देते हुए अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, बिहार में हमारी सरकार द्वारा बढ़ाई गई 65% आरक्षण की सीमा को रोक देने से अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 16% आरक्षण का सीधा नुकसान हो रहा है. जिससे इन वर्गों के 50000 से अधिक युवाओं को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. TRE 3 शिक्षक नियुक्ति की के तीसरे चरण में भी आरक्षण लागू नहीं होने से इन वर्गों के हजारों अभ्यर्थियों को हजारों नौकरियों का नुकसान हुआ.


जब वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ वह डिप्टी सीएम थे तब बिहार सरकार ने आरक्षण की सीमा 50% से बढ़कर 65% तक कर दी थी. ईडब्ल्यूएस कोटे को मिलाकर बिहार में आरक्षण की सीमा 75% तक हो गई थी. लेकिन, पहले हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में यह मामला गया और इस पर रोक लगी हुई है और यह फैसला बिहार में लागू नहीं हो पाया. जाहिर तौर पर जब यह एक ऐसा मुद्दा है जो बिहार के जन मानस को गहरे तक छूता है. इसका लाभ पहले राजद ने भरपूर उठाया भी है

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