सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला है। राज्य में सत्ता की बागडोर संभालने के बाद से ही ‘एक्टिव मोड’ में चल रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार की सुबह अचानक मुख्य सचिवालय पहुंचकर अधिकारियों को चौंका दिया। मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा सचिवालय परिसर में बड़ी हलचल और अधिकारियों के बीच हड़कंप का कारण बन गया।
नए कार्यकाल की शुरुआत के बाद से ही मुख्यमंत्री लगातार विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर ज़ोर दे रहे हैं। इसी क्रम में, आज सुबह मुख्यमंत्री बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे मुख्य सचिवालय जा पहुंचे। उन्होंने परिसर में घूम-घूमकर तमाम कार्यालयों का जायजा लिया और प्रशासनिक कामकाज की स्थिति का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण किया।
अधिकारियों से मुलाकात और निरीक्षण
यह मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार का मुख्य सचिवालय का पहला अचानक दौरा था, जिसकी वजह से अधिकारी सकते में आ गए। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से मुलाकात की और उनसे प्रशासनिक कार्यों की प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने सीधे अधिकारियों से बातचीत की, यह सुनिश्चित करने के लिए कि जमीनी स्तर पर काम कैसे चल रहा है। खास बात यह रही कि इस पूरे औचक निरीक्षण के दौरान कोई भी मंत्री उनके साथ मौजूद नहीं था, जिससे स्पष्ट है कि यह दौरा पूरी तरह से प्रशासनिक निगरानी और पारदर्शिता पर केंद्रित था।
प्रशासनिक सक्रियता पर ज़ोर: बैठकों का दौर जारी
मुख्यमंत्री का यह अचानक दौरा उनकी उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वे राज्य में प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रभावशीलता को बढ़ाना चाहते हैं।
इससे ठीक एक दिन पहले, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग और निगरानी विभाग की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकें की थीं। उन बैठकों में उन्होंने दोनों विभागों के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट ली थी और कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि प्रशासनिक प्रक्रियाएं तेज हों और सरकारी योजनाएं बिना किसी देरी और भ्रष्टाचार के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह ‘अचानक दस्तक’ अधिकारियों को एक स्पष्ट संदेश है कि नई सरकार में प्रशासनिक ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी को जवाबदेह और सक्रिय रहना होगा। यह कदम सुशासन और त्वरित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा संकेत है। मुख्यमंत्री की सक्रियता से यह साफ है कि वह आने वाले समय में प्रशासनिक सुधारों को अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखेंगे।