चिराग पासवान ने प्रशांत किशोर की तुलना केजरीवाल से किया और , राहुल गांधी की सोच को बताया बिहार के लिए हानिकारक

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति में इन दिनों प्रशांत किशोर (पीके) द्वारा लगाए जा रहे लगातार भ्रष्टाचार के आरोपों पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। चिराग पासवान ने प्रेस से बात करते हुए पीके की ‘आरोप-आधारित राजनीति’ की तुलना दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल की पुरानी रणनीति से की और प्रशांत किशोर के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

चिराग पासवान ने कहा, “प्रशांत जी एक के बाद एक आरोप लगा रहे हैं… मैं मानता हूँ कि ये तमाम बातें जांच का विषय हैं।” उन्होंने पीके से सवाल किया कि क्या वह सही मायने में तथ्यों के साथ ये जानकारी साझा कर रहे हैं या सिर्फ आरोप लगा रहे हैं। चिराग ने आगे कहा कि इस तरह की राजनीति उन्होंने एक बार दिल्ली में भी देखी थी।

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उन्होंने याद दिलाया, “जब दिल्ली में भी मुख्यमंत्री बनने से पहले आम आदमी पार्टी के नेता आए थे और आरोपों की सूची लगा दी थी। उसके बाद जब उनके पास वक्त आया कि वो उस सूची पर कुछ कार्यवाही कर सकें, तो उन्होंने कुछ नहीं किया।” चिराग पासवान ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दिया कि प्रशांत किशोर की राजनीति भी निराधार आरोपों पर टिकी है।

आरोपों पर नेताओं का बचाव
चिराग पासवान ने हालांकि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी या अन्य नेताओं का सीधा समर्थन नहीं किया, जिन पर प्रशांत किशोर ने आरोप लगाए हैं, लेकिन अप्रत्यक्ष तरीके से उनका बचाव करते दिखे। उन्होंने कहा कि जिन-जिन पर आरोप लगाए गए हैं, “वह खुद सक्षम हैं अपना पक्ष रखने के लिए।”

उन्होंने आगे कहा, “उनमें से कुछ नेताओं ने मानहानि का दावा भी किया है। और भी समय-समय ये आरोप लगाएंगे और वो (नेता) जवाब देंगे, और सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।” इस बयान से स्पष्ट है कि चिराग पासवान, जो स्वयं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा हैं, गठबंधन के नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत और समय पर छोड़ने के पक्ष में हैं।

राहुल गांधी की नीतियों पर भी प्रहार
पीके के आरोपों पर बोलने के बाद, चिराग पासवान ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की नीतियों और सोच पर भी हमला बोला। उन्होंने बिहार की राजनीति में जाति-आधारित विभाजनकारी सोच की आलोचना की। चिराग ने कहा, “EBC, OBC, दलित, महादलित… ये सारी सोच नेता प्रतिपक्ष की हो सकती है। मैंने आज तक किसी को बिहार में न दलित समझा, न महादलित समझा, न अगड़ा समझा, न पिछड़ा समझा, न मुस्लिम समझा। मेरे लिए बिहारी, बिहारी है।”

उन्होंने अपनी प्राथमिकता दोहराते हुए कहा, “मैं बात करूँगा तो बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट की बात करूँगा। और यही सोच ने बिहार को बर्बाद किया है। आज अपने आप को इक्कीसवीं सदी का बताते हैं…।” चिराग पासवान का यह बयान स्पष्ट रूप से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की जाति-जनगणना और आरक्षण से संबंधित राजनीति पर सीधा हमला था, जिसमें उन्होंने खुद को बिहार की अखंड पहचान के पैरोकार के रूप में पेश किया।

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