सिटी पोस्ट लाइव
चुनावी वर्ष में बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। चाचा पशुपति पारस ने अपने भतीजे चिराग पासवान को करारा झटका देते हुए, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खगड़िया जिलाध्यक्ष सहित 38 प्रमुख नेताओं को अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोलोजपा) में शामिल करा लिया है। इस सामूहिक इस्तीफे और पाला बदलने से चिराग पासवान की पार्टी को खगड़िया में बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं पशुपति पारस की रालोलोजपा को मजबूती मिली है।
आज आयोजित एक मिलन समारोह में, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पूर्व जिलाध्यक्ष रामजन्म यादव के नेतृत्व में इन सभी नेताओं ने औपचारिक रूप से रालोलोजपा का दामन थाम लिया। इस अवसर पर इन नेताओं ने चिराग पासवान की पार्टी के सांसद राजेश वर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि राजेश वर्मा के कार्यशैली और उनके ही कारण उन्हें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का साथ छोड़ना पड़ा है। इन सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि वे अब पशुपति पारस के नेतृत्व में पूरे बिहार में उनके हाथों को मजबूत करेंगे और आने वाले चुनावों में रालोलोजपा को सशक्त बनाने के लिए काम करेंगे।
इस अवसर पर राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने दल-बदल करने वाले सभी नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “इन नेताओं के हमारी पार्टी में शामिल होने से हमारी पार्टी और मजबूत हुई है।” पारस ने आगे कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी पूरे भारत में अपनी शाखाएं फैलाएगी और संगठन को देश के अलग-अलग राज्यों में मजबूत करेगी। यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति में पासवान परिवार के भीतर चल रही खींचतान को और गहरा कर रहा है और आगामी चुनावों में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि चिराग पासवान इस झटके से कैसे उबरते हैं और अपनी पार्टी को फिर से मजबूत करने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं।