मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब केवल पेट्रोल-डीजल या गैस सिलेंडर की कीमतों तक सीमित नहीं रह गया है। इसका एक सीधा और गंभीर असर भारत की कंडोम इंडस्ट्री और देश के फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम पर पड़ता दिख रहा है।

कच्चे माल का संकट और ‘मिडिल ईस्ट’ कनेक्शन;
भारत की लगभग $860 मिलियन (₹8,026 करोड़) की कंडोम इंडस्ट्री कच्चे माल के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के कारण दो महत्वपूर्ण रसायनों की आपूर्ति बाधित हो रही है।
1) अमोनिया (Ammonia): यह लेटेक्स (प्राकृतिक रबर) को लिक्विड फॉर्म में सुरक्षित रखने के लिए अनिवार्य है। भारत अपनी जरूरत का 86% अमोनिया सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे देशों से मंगाता है।
2) सिलिकॉन ऑयल (Silicon Oil): यह कंडोम में लुब्रिकेंट के तौर पर इस्तेमाल होता है और पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन से जुड़ा है, जो युद्ध के कारण प्रभावित हुई है।

भारतीय कंपनियों पर दबाव;
भारत हर साल करीब 400 करोड़ कंडोम का उत्पादन करता है। कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत का असर दिग्गज कंपनियों पर पड़ रहा है:
– HLL Lifecare Ltd: सरकारी स्वामित्व वाली यह कंपनी सालाना 200 करोड़ कंडोम बनाती है। सप्लाई चेन रुकने से सरकारी वितरण योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
– प्राइवेट प्लेयर्स: मैनकाइंड फार्मा (Mankind Pharma) और क्यूपिड लिमिटेड (Cupid Ltd) जैसे बड़े ब्रांड्स को भी प्रोडक्शन कॉस्ट मैनेज करने में मुश्किल आ रही है।

समाज और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव;
यदि कंडोम की कीमतें बढ़ती हैं या बाजार में इनकी कमी होती है, तो इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं:
1) अनचाही प्रेग्नेंसी में बढ़ोतरी: विशेषकर ग्रामीण और कम आय वाले क्षेत्रों में, जहाँ लोग बढ़ी हुई कीमतों के कारण कंडोम खरीदने से कतरा सकते हैं।
2) हेल्थ केयर बजट पर बोझ: जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को धक्का लगने से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ेगा।
3) STIs का खतरा: सुरक्षित यौन संबंधों में कमी आने से यौन संचारित रोगों (STIs) के फैलने का जोखिम बढ़ जाता है।

आगे की राह;
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए सरकार और इंडस्ट्री को मिलकर कदम उठाने होंगे:
– विकल्पों की खोज: अमोनिया और अन्य रसायनों के लिए दूसरे देशों (जैसे वियतनाम या थाईलैंड) से आयात के विकल्प तलाशना।
– सब्सिडी और बफर स्टॉक: सरकार को कंडोम जैसी आवश्यक सामग्री के लिए ‘प्राइस कैप’ लगाने या कच्चे माल का बफर स्टॉक तैयार करने पर विचार करना चाहिए।