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बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान के तहत एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। अररिया जिले के नरपतगंज अंचल में तैनात एक राजस्व कर्मचारी को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़ा रुख अपनाया है। डिप्टी सीएम के सीधे हस्तक्षेप और निर्देश के बाद आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और अब उसे सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
15 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तारी
मामला नरपतगंज अंचल के फरही पंचायत का है, जहाँ तैनात राजस्व कर्मचारी मो. इम्तियाज आलम को निगरानी विभाग (Vigilance Department) की टीम ने मंगलवार की शाम को गिरफ्तार किया। जानकारी के अनुसार, आरोपी कर्मचारी ने रामघाट वार्ड संख्या 14 के निवासी किसान कमलेश्वरी यादव से जमीन के ‘परिमार्जन’ (Land Records Correction) के नाम पर अवैध राशि की मांग की थी।
पीड़ित किसान ने बताया कि उसने पहले भी कर्मचारी को पैसे दिए थे, लेकिन काम नहीं हुआ। इसके बाद कर्मचारी ने दोबारा 20 हजार रुपये की मांग की। परेशान होकर किसान ने पटना स्थित विशेष निगरानी इकाई में इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की पुष्टि होने के बाद निगरानी टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही किसान ने 15 हजार रुपये की पहली किस्त कर्मचारी को सौंपी, टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।
डिप्टी सीएम की दो टूक: भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
इस घटना पर संज्ञान लेते हुए उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग को स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग में आम नागरिकों और किसानों का शोषण करने वाले किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। सिन्हा ने अररिया जिला समाहर्ता को निर्देश दिया कि न केवल कर्मचारी को निलंबित किया जाए, बल्कि उसे सरकारी सेवा से पूरी तरह बर्खास्त करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
डिप्टी सीएम ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के लिए कोई जगह नहीं है। हमारा लक्ष्य एक पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन देना है। किसानों को उनके छोटे-छोटे कामों के लिए परेशान करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थान ऑफिस में नहीं, बल्कि जेल में होगा।”
बर्खास्तगी का संदेश
इस कार्रवाई से बिहार के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल निलंबन ही काफी नहीं है; गंभीर कदाचार के मामलों में सेवा समाप्ति यानी बर्खास्तगी (Dismissal) की जाएगी ताकि अन्य कर्मचारियों के लिए यह एक कड़ा सबक बन सके।