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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए शिक्षक बहाली में डोमिसाइल पॉलिसी लागू करने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद अब शिक्षकों की नियुक्ति में बिहार के मूल निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को इस संबंध में जरूरी संशोधन करने का निर्देश दिया है, और यह नीति TRE-4 (Teacher Recruitment Exam-4) से प्रभावी होगी।

इस घोषणा से राज्य में चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन को भी बल मिला है। पटना के गांधी मैदान में छात्र पिछले कुछ समय से प्रदर्शन कर रहे थे, जिनकी मुख्य मांग थी कि बिहार की सरकारी नौकरियों में 90-95% आरक्षण राज्य के मूल निवासियों के लिए तय किया जाए। उनका तर्क था कि बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों के बजाय बिहार के योग्य युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री का यह फैसला छात्रों की इस मांग को सीधे तौर पर पूरा करता है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि उनकी सरकार ने नवंबर 2005 में सत्ता में आने के बाद से ही शिक्षा के सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्तियां की गई हैं और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि TRE-4 परीक्षा 2025 में आयोजित की जाएगी, जबकि TRE-5 2026 में होगा। साथ ही, TRE-5 से पहले STET (Secondary Teacher Eligibility Test) का आयोजन करने का निर्देश भी दिया गया है।
इस फैसले से बिहार के लाखों युवाओं को उम्मीद है कि उन्हें राज्य में ही रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। डोमिसाइल नीति को लागू करने का यह कदम न केवल स्थानीय युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करेगा, बल्कि राज्य की शिक्षा प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।