बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कड़ी लड़ाई और रिकॉर्ड 66.91% की मतदान भागीदारी के बाद अब सबकी नज़रें काउंटिंग पर टिक गई हैं। एग्जिट पोल में एनडीए की बढ़त दिखने के बीच काउंटिंग डे की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है, इसलिए काउंटिंग सेंटर में कुछ वस्तुएँ सख्ती से प्रतिबंधित रहती हैं। गलती से भी ये सामान लेकर पहुंचना भारी पड़ सकता है, क्योंकि मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मी और पुलिस तुरंत एक्शन में आ जाते हैं। आगे जानिए कौन-कौन सी चीजें नहीं ले जानी चाहिए और किस हालात में पुलिस तुरन्त पकड़ लेती है।
काउंटिंग सेंटर में सुरक्षा के सख्त इंतज़ाम रहते हैं। यहां मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, हथियार या किसी भी तरह का संदिग्ध सामान बिल्कुल भी ले जाना मना है। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता पकड़ा जाता है तो पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है। मतगणना की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हर एजेंट को पहचान बैज दिया जाता है और हॉल में प्रवेश सिर्फ रिटर्निंग अधिकारी की अनुमति से ही मिलता है। एक बार हॉल में आने के बाद एजेंट को बाहर जाने की इजाजत नहीं होती। मतगणना से जुड़ी जानकारी रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट, 1951 की धारा 128 और 129 के तहत पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। मतगणना शुरू होने से पहले अधिकारियों को हॉल और टेबल नंबर रैंडम तरीके से आवंटित किए जाते हैं। हर हॉल में अधिकतम 14 टेबल होती हैं, जबकि एक टेबल रिटर्निंग ऑफिसर के लिए निर्धारित रहती है। विशेष परिस्थितियों में टेबल की संख्या बढ़ाई जा सकती है। वहीं, किसी उम्मीदवार के अधिकतम 15 एजेंट ही एक हॉल में मौजूद रह सकते हैं।
मतगणना केंद्र पर किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनुशासनहीनता को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट, 1951 की धारा 136 के तहत, ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी या नागरिक को 6 महीने से 2 साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि किसी ईवीएम में छेड़छाड़ की शिकायत मिलती है, तो रिटर्निंग ऑफिसर तुरंत जांच करता है और गड़बड़ी साबित होने पर उस मशीन की गिनती रोक दी जाती है। इसकी पूरी रिपोर्ट राज्य और केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजी जाती है। इन सख्त प्रावधानों का मकसद यही है कि मतगणना प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनी रहे।