तेजस्वी यादव के केस के कारण राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड बंगला छिनने का आदेश, अब 39 हार्डिंग रोड नया पता

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उनका 20 साल पुराना निवास स्थान 10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बंगला उन्हें दो दशक पहले नीतीश कुमार ने ही पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते आजीवन रहने के लिए आवंटित करवाया था।

विडंबना यह है कि लालू परिवार से यह सरकारी आवास छिनने का आदेश अप्रत्यक्ष रूप से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव द्वारा 2017 में दायर किए गए एक कानूनी मामले के चलते आया है, जिसने बाद में पटना उच्च न्यायालय को पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए आजीवन बंगला आवंटन की व्यवस्था को ही असंवैधानिक घोषित करने के लिए प्रेरित किया था।

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नीतीश ने किया था परमानेंट आवास का इंतजाम
लालू परिवार 1990 से 2005 तक मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग में रहा था। 2005 में सत्ता बदलने के बाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया था। उन्होंने सरकारी नियमों में बदलाव करके राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए पटना में आजीवन सरकारी आवास, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं का इंतजाम सुनिश्चित किया था।

इस फैसले के तहत, 16 जनवरी 2006 से राबड़ी देवी को पूर्व मुख्यमंत्री होने की हैसियत से 10 सर्कुलर रोड का बंगला आवंटित किया गया था, जहां लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, और उनका परिवार पिछले दो दशकों से रह रहा था। इस नियम से राबड़ी देवी के अलावा जीतन राम मांझी और जगन्नाथ मिश्रा जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी आजीवन सरकारी आवास मिला हुआ था।

तेजस्वी के एक केस से बदल गए नियम
2017 में, जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़कर एनडीए के साथ सरकार बनाई, तब डिप्टी सीएम पद गंवाने वाले तेजस्वी यादव को 5 देशरत्न मार्ग स्थित बंगला खाली करने का नोटिस मिला, क्योंकि वह बंगला उप-मुख्यमंत्री के लिए फिक्स था और नए डिप्टी सीएम सुशील मोदी को आवंटित होना था।

तेजस्वी यादव ने इस नोटिस के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए ‘पूर्व मुख्यमंत्रियों और उच्च पदों से जुड़े लोगों के आवास और सुविधाओं में नियमों का स्पष्ट निर्धारण’ करने की मांग की थी।

इस मामले की सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट की डबल बेंच ने फरवरी 2019 में तेजस्वी यादव की याचिका को तो खारिज कर दिया, लेकिन एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने भवन निर्माण विभाग की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद यह स्पष्ट किया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाला आजीवन बंगला और सुविधाएं देने की व्यवस्था असंवैधानिक है।

इस फैसले के चलते ही अब, जब बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार अधिक मजबूत होकर सत्ता में आई है, तो भवन निर्माण विभाग ने हाईकोर्ट के 2019 के फैसले को आधार बनाकर राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड खाली करने का नोटिस जारी कर दिया है।

अब क्या होगा लालू परिवार का नया पता?
भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड के बदले 39, हार्डिंग रोड पर बंगला आवंटित किया है। यह नया आवास उन्हें उनकी वर्तमान हैसियत विधान परिषद में विपक्ष की नेता के नाते मिला है। उनके बेटे तेजस्वी यादव पहले से ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते 1 पोलो रोड वाले बंगले में रह रहे हैं।

इस नोटिस पर आरजेडी नेता तेज प्रताप यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा, “छोटे भाई ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बड़े भाई के बंगले को खाली करने का आदेश दे दिया… इस घर के जाने के साथ ही नीतीश जी और लालू जी के बीच के भैयारी वाले नैतिक रिश्ते का भी अंत हो गया है।” लालू परिवार के लिए यह न केवल आवासीय, बल्कि भावनात्मक और राजनीतिक बदलाव भी है।

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