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लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होने का अवसर जमुई जिले के चार गांवों के ग्रामीणों को 77 साल बाद पहली बार मिलने जा रहा है। आजादी के इतने वर्षों बाद पहली बार यहां मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिससे इन गांवों के लोगों में एक ऐतिहासिक उत्साह देखने को मिल रहा है।
जमुई जिले के चिहरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गगनपुर, बिदली, राजाडुमर और मंझलाडीह गांवों के लिए यह विधानसभा चुनाव एक नए युग की शुरुआत लेकर आया है। इन गांवों के निवासियों को अब तक वोट डालने के लिए लगभग 20 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती थी, क्योंकि सुरक्षा कारणों से यहां कभी मतदान केंद्र स्थापित नहीं किए गए थे। यह सभी गांव अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र माने जाते थे, जिसके कारण हर चुनाव में इनके मतदान केंद्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाता था।
सुरक्षा के बीच पहली बार बना बूथ
इस बार के विधानसभा चुनाव में, जिला प्रशासन ने एक बड़ा और साहसिक कदम उठाते हुए इन चारों गांवों में पहली बार मतदान केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निर्भीक बनाने के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) विश्वजीत दयाल ने खुद इन दूर-दराज के गांवों का दौरा किया और सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से मिलकर उन्हें निर्भीक होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की। एसपी विश्वजीत दयाल ने कहा, “प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोकतंत्र के इस महापर्व में प्रत्येक मतदाता शामिल हो सके और कोई भी नागरिक अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित न रहे। हमने पूरे क्षेत्र में सघन गश्ती और निगरानी की व्यवस्था की है।”
ग्रामीणों में खुशी की लहर
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को अपने गांव में देखकर स्थानीय ग्रामीणों का उत्साह चरम पर है। गगनपुर निवासी पप्पू यादव ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह 2009 से मतदान कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें अपने गांव में वोट डालने का अवसर नहीं मिला। हर बार उन्हें लंबी दूरी तय करके दूसरे गांव जाना पड़ता था। उन्होंने कहा, “अब गांव में ही बूथ बनने से हम सब बेहद उत्साहित हैं। पहले दूरी और भय के कारण कई बुजुर्ग और महिलाएं मतदान नहीं कर पाती थीं, लेकिन अब हर कोई वोट देने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।”
स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन के इस भरोसे पर अपनी खुशी और कृतज्ञता व्यक्त की है और कहा है कि वे इस मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। यह कदम न केवल इन गांवों में लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करेगा, बल्कि यह भी संदेश देगा कि सुरक्षा और विकास अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक भी पहुंच रहे हैं। जमुई में यह विधानसभा चुनाव इन चार गांवों के लिए केवल एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आजादी के 77 साल बाद मिली एक लोकतांत्रिक जीत है।