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बिहार विधानसभा के बजट सत्र 2026 में नीतीश सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। केंद्र सरकार की ‘पीएम किसान योजना’ की तर्ज पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य स्तर पर एक क्रांतिकारी योजना की घोषणा की है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद बिहार के किसानों को अब साल में मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़कर ₹9,000 हो जाएगी, जो देश के कई राज्यों के लिए एक नजीर पेश करेगी।
क्या है ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना’?
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना’ शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत, बिहार के पात्र किसानों को केंद्र सरकार से मिलने वाले सालाना ₹6,000 के अतिरिक्त, राज्य सरकार की ओर से ₹3,000 प्रति वर्ष अलग से दिए जाएंगे। इस प्रकार, बिहार का किसान अब सालाना कुल ₹9,000 की सम्मान निधि का हकदार होगा।
केंद्र से पहले बिहार ने दिखाई राह
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। लंबे समय से देश भर में पीएम-किसान की राशि ₹6,000 से बढ़ाकर ₹9,000 करने की मांग उठ रही थी। केंद्रीय बजट 2026 में इस पर कोई घोषणा न होने के बाद, बिहार ने अपने संसाधनों से इसे लागू कर यह जता दिया है कि कृषि और किसान उसकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी के प्रवाह को बढ़ाएगा और छोटे किसानों को बीज, खाद व अन्य जरूरतों के लिए साहूकारों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
22वीं किस्त और e-KYC की चेतावनी
फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी होने की उम्मीद है। बिहार के किसान इस किस्त के साथ-साथ अब राज्य सरकार की नई योजना के लाभ को लेकर भी उत्साहित हैं। हालांकि, कृषि विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि जिन किसानों का e-KYC और आधार सीडिंग अधूरा है, उनका पैसा अटक सकता है। लाभार्थियों को सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द अपने नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर पर जाकर अपनी जानकारी अपडेट करा लें।
कृषि रोडमैप और बढ़ता बजट
बिहार का कुल बजट अब ₹3.17 लाख करोड़ के पार पहुँच चुका है। सरकार का तर्क है कि कृषि क्षेत्र राज्य की रीढ़ है, इसलिए बजट का एक बड़ा हिस्सा ‘चौथे कृषि रोडमैप’ और डीबीटी (DBT) के जरिए किसानों को सीधे लाभ पहुँचाने के लिए आवंटित किया गया है। विपक्ष ने जहां इसे चुनावी स्टंट करार दिया है, वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि सीधे नकद हस्तांतरण से किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी।