भारतीय क्रिकेट में यह माना जाता है कि अगर आप अंडर-19 वर्ल्ड कप खेल लेते हैं, तो टीम इंडिया का रास्ता आसान हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के सबसे सफल कप्तान, सबसे महान बल्लेबाज और सबसे घातक गेंदबाज इस लिस्ट का हिस्सा ही नहीं थे? कड़ी मेहनत और जुनून के दम पर इन 10 खिलाड़ियों ने साबित किया कि सफलता किसी टूर्नामेंट की मोहताज नहीं होती।

सचिन तेंदुलकर: रिकॉर्ड्स के ‘भगवान’
क्रिकेट के सर्वकालिक महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने 1989 में महज 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। वे 1988 के यूथ वर्ल्ड कप के लिए पात्र थे, लेकिन उन्होंने उसमें भाग नहीं लिया। इसके बजाय, उन्होंने सीधे सीनियर टीम में जगह बनाई और 24 साल लंबे करियर में ‘शतकों का शतक’ जड़कर इतिहास रच दिया।

महेंद्र सिंह धोनी: आईसीसी ट्रॉफी के ‘बादशाह’
दुनिया के इकलौते कप्तान जिन्होंने आईसीसी की तीनों बड़ी ट्रॉफियां (T20 वर्ल्ड कप, वनडे वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी) जीती हैं, उन्होंने कभी जूनियर वर्ल्ड कप नहीं खेला। धोनी 1998 और 2000 के टूर्नामेंट के लिए योग्य थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। बाद में उन्होंने अपनी कप्तानी से भारतीय क्रिकेट की किस्मत ही बदल दी।

सौरव गांगुली: ‘प्रिंस ऑफ कोलकाता’
भारतीय टीम को आक्रामकता सिखाने वाले सौरव गांगुली 1988 के यूथ वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं थे। उन्होंने 1992 में अपना वनडे डेब्यू किया और आगे चलकर भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली कप्तानों में से एक बने।

राहुल द्रविड़: भारतीय क्रिकेट की ‘दीवार’
टीम इंडिया के ‘मिस्टर भरोसेमंद’ राहुल द्रविड़ ने 500 से ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेले, लेकिन 1988 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में वे शामिल नहीं थे। द्रविड़ सालों तक भारतीय मिडिल ऑर्डर की रीढ़ की हड्डी बने रहे।

अनिल कुंबले: भारत के सबसे बड़े मैच विनर
भारत की ओर से टेस्ट और वनडे में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले अनिल कुंबले ने कभी अंडर-19 वर्ल्ड कप नहीं खेला। 1990 में डेब्यू करने वाले इस लेग स्पिनर ने अपनी फिरकी से दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर किया।

जसप्रीत बुमराह: यॉर्कर किंग
आज दुनिया के सबसे घातक गेंदबाज माने जाने वाले जसप्रीत बुमराह 2010 और 2012 के अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए उपलब्ध थे, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ। 22 साल की उम्र में डेब्यू करने के बाद बुमराह ने अपनी अनोखी गेंदबाजी से भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाईं।

रविचंद्रन अश्विन: फिरकी के जादूगर
अश्विन भारत के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज हैं। वे 2004 और 2006 में जूनियर वर्ल्ड कप खेल सकते थे, लेकिन मौका नहीं मिला। आज वे न केवल गेंदबाजी, बल्कि निचले क्रम में अपनी बल्लेबाजी से भी टीम इंडिया के सबसे बड़े ‘ट्रम्प कार्ड’ साबित होते हैं।

हार्दिक पांड्या: आधुनिक दौर के महान ऑलराउंडर
हार्दिक पांड्या की गिनती भारत के महानतम ऑलराउंडरों में होती है। बुमराह की तरह वे भी 2010 और 2012 के अंडर-19 चयन से चूक गए थे। आज वे खेल के तीनों प्रारूपों में भारत की ताकत हैं और टी20 टीम के उप-कप्तान के रूप में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

सूर्यकुमार यादव: टी20 के ‘मिस्टर 360’
भारत की वर्तमान टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी कभी जूनियर वर्ल्ड कप नहीं खेला। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लंबे संघर्ष के बाद टीम इंडिया में जगह बनाई और आज वे दुनिया के सबसे खतरनाक टी20 बल्लेबाज माने जाते हैं।

मोहम्मद शमी: वर्ल्ड कप के हीरो
वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में भारत के सबसे सफल गेंदबाज मोहम्मद शमी को कभी अंडर-19 वर्ल्ड कप में खेलने का मौका नहीं मिला। अपनी सीम और रफ्तार के दम पर उन्होंने खुद को भारत के सर्वकालिक महान तेज गेंदबाजों की सूची में शामिल कराया है।