सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आज सुबह एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। रोहतास जिले के अकोढ़ीगोला प्रखंड में निगरानी विभाग की टीम ने जाल बिछाकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) के डेटा ऑपरेटर को रंगे हाथों घूस लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद से शिक्षा विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है।
14 हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा गया ऑपरेटर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अकोढ़ीगोला प्रखंड शिक्षा कार्यालय में कार्यरत डेटा ऑपरेटर चंदन कुमार शर्मा को निगरानी की टीम ने 14,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी चंदन शर्मा के अकोढ़ीगोला स्थित निजी आवास से की गई है। निगरानी विभाग ने यह कार्रवाई एक गुप्त सूचना और सत्यापन के आधार पर की।
शिक्षकों के वेतन निर्धारण के नाम पर मांगी थी ‘कमीशन’
निगरानी डीएसपी विंध्याचल प्रसाद ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि अकोढ़ीगोला के एक शिक्षक सुनील कुमार ने विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) प्रणव कुमार क्षेत्र के लगभग 10 शिक्षकों के वेतन निर्धारण (Pay Fixation) की फाइल आगे बढ़ाने के बदले प्रति शिक्षक मोटी रकम की मांग कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि शिक्षकों से कुल 15,000 रुपये की मांग की गई थी, लेकिन काफी मान-मनौव्वल के बाद मामला 14,000 रुपये में तय हुआ। शिकायतकर्ता शिक्षक ने इसकी सूचना निगरानी विभाग को दे दी, जिसके बाद विभाग ने मामले की सत्यता जांची और छापेमारी के लिए विशेष टीम का गठन किया।
फरार हुए BEO, मोबाइल भी बंद
डेटा ऑपरेटर चंदन शर्मा की गिरफ्तारी के तुरंत बाद निगरानी की टीम डेहरी स्थित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी प्रणव कुमार के आवास पर भी पहुंची। हालांकि, भनक लगते ही बीईओ साहब वहां से फरार हो गए। छापेमारी के दौरान वे अपने घर पर मौजूद नहीं थे और उनका मोबाइल फोन भी लगातार स्विच ऑफ आ रहा है। निगरानी विभाग की टीम अब बीईओ की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर नजर रख रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी चेतावनी
निगरानी ब्यूरो की इस सफल कार्रवाई ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गिरफ्तार डेटा ऑपरेटर को पटना स्थित निगरानी की विशेष अदालत में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्थानीय लोगों और शिक्षकों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है, क्योंकि वेतन निर्धारण जैसे बुनियादी काम के लिए भी सरकारी कर्मचारियों द्वारा अवैध वसूली की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं।