भारत अगले साल 114 राफेल जेट खरीदने के लिए कर सकता है समझौता, कुछ ‘रेडी टू फ्लाई’ कंडीशन में मिलेंगे

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
भारतीय वायु सेना (IAF) अगले वित्तीय वर्ष तक फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू जेट खरीदने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी में है. सूत्रों के अनुसार, इस सौदे को केंद्र सरकार का पूरा समर्थन प्राप्त है. इस योजना के तहत, कम से कम 18 विमान ‘रेडी टू फ्लाई’ (fly-away condition) स्थिति में जल्द से जल्द वितरित किए जाएंगे, जबकि बाकी विमान भारत में ही स्वदेशी कलपुर्जों के साथ निर्मित किए जाएंगे.

रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों ने ‘द प्रिंट’ को बताया कि फ्रेंच एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारत में इन लड़ाकू विमानों के लिए एक अंतिम असेंबली लाइन स्थापित करेगी. इसका लक्ष्य कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल करना है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए एक बड़ा कदम होगा.

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यह भी पता चला है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम को रद्द करने का फैसला किया है. इसके बजाय, फ्रांस के साथ राफेल जेट के लिए सीधे सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते का विकल्प चुना गया है. यह कदम खरीद प्रक्रिया को गति देने और भारत की वायु शक्ति को मजबूत करने के लिए लिया गया है.

उन्नत F4 प्लस संस्करण, लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायु सेना द्वारा हासिल किए जाने वाले राफेल विमान स्टैंडर्ड F4 प्लस संस्करण होंगे. ये मौजूदा भारतीय बेड़े में शामिल राफेल की तुलना में अधिक उन्नत होंगे. ये विमान लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (दो) और हवा से जमीन पर मार करने वाले हथियारों से लैस होंगे, जिससे उनकी मारक क्षमता में काफी वृद्धि होगी.

भारतीय वायु सेना ने हाल ही में 114 राफेल जेट के लिए अपना प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को प्रस्तुत किया है. यह प्रस्ताव वर्तमान में रक्षा वित्त सहित मंत्रालय के विभिन्न विंगों के विचाराधीन है. एक बार विचार-विमर्श पूरा हो जाने के बाद, प्रस्ताव को रक्षा खरीद बोर्ड में भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. डीएसी से ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ मिलने के बाद ही औपचारिक बातचीत शुरू होगी.

यह सौदा भारत की सुरक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह वायु सेना की लड़ाकू क्षमताओं को एक बड़ा बढ़ावा देगा. राफेल जेट अपनी बहु-भूमिका क्षमताओं, उन्नत एवियोनिक्स और अत्याधुनिक हथियारों के लिए जाने जाते हैं. ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इन विमानों का उत्पादन न केवल रोजगार के अवसर पैदा करेगा, बल्कि भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को भी मजबूत करेगा.

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