सिर्फ स्किन का फूलना नहीं, बल्कि दिमाग का है मास्टरस्ट्रोक! उंगलियों के सिकुड़ने के पीछे का वैज्ञानिक सच…

Ritu Raj

क्या आपने कभी सोचा है कि नहाते समय या स्विमिंग पूल में देर तक रहने के बाद आपकी उंगलियां किसी बुजुर्ग की त्वचा की तरह झुर्रियों वाली क्यों हो जाती हैं? अक्सर लोग इसे त्वचा द्वारा पानी सोखना मान लेते हैं, लेकिन विज्ञान की नजर में यह हमारे दिमाग और नर्वस सिस्टम की एक शानदार इंजीनियरिंग है। वहीं,पानी से बाहर आते ही जैसे ही हाथ सूखते हैं, खून का बहाव सामान्य हो जाता है और त्वचा अपनी पुरानी स्थिति में लौट आती है। यह कुदरत का एक अद्भुत तरीका है जो हमें मुश्किल हालात (गीली सतह) में बेहतर तालमेल बिठाने में मदद करता है।

यह कैसे काम करता है?
यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल रिएक्शन है। इसकी प्रक्रिया कुछ इस तरह होती है:
मैसेज: जब हाथ-पैर ज्यादा देर पानी में रहते हैं, तो नसें दिमाग को सिग्नल भेजती हैं।
एक्शन: जवाब में हमारा ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम उंगलियों की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को सिकोड़ देता है।
रिजल्ट: खून का प्रवाह कम होते ही त्वचा अंदर की तरफ खिंच जाती है और झुर्रियां बन जाती हैं।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बदलाव हमारे पूर्वजों के समय से चला आ रहा है। उंगलियों पर बनी ये झुर्रियां ठीक वैसे ही काम करती हैं जैसे गाड़ी के टायरों में बनी ‘ग्रूव’ (नक्काशी)। दरअसल, ये झुर्रियां पानी को उंगलियों के बीच से बाहर निकाल देती हैं। इससे गीली सतह पर चीजों को पकड़ना या पानी के अंदर काम करना आसान हो जाता है। बिना झुर्रियों के, गीली चीजें हाथ से फिसल सकती थीं।

सेहत का एक ‘हेल्थ चेकअप’;
बता दें कि अगर आपकी उंगलियां पानी में सिकुड़ रही हैं, तो इसका मतलब है कि आपका नर्वस सिस्टम एकदम सही काम कर रहा है। जिन लोगों की नसों में समस्या (Nerve Damage) होती है, उनकी त्वचा पानी में रहने के बाद भी नहीं सिकुड़ती। इसलिए, यह झुर्रियां एक तरह से आपके शरीर का ‘सेल्फ-टेस्ट’ हैं।

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