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जमुई के इस चुनावी माहौल में इस बार काफी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले चुनावों में जीत दर्ज करने वाले तीन बड़े नाम इस बार चुनावी लड़ाई से बाहर रहेंगे। इनमें जमुई के पूर्व विधायक अजय प्रताप, पूर्व मंत्री विजय प्रकाश और सिकंदरा के पूर्व विधायक सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी शामिल हैं। वहीं, झाझा के पूर्व विधायक रविंद्र यादव के पुत्र शिवराज यादव बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और अपनी किस्मत आजमाने को तैयार हैं।
राजद ने इस बार जमुई की माई समीकरण को ध्यान में रखते हुए शमशाद आलम को अपना प्रत्याशी बनाया है। शमशाद आलम 2020 के चुनाव में जाप के टिकट पर लगभग 18 हजार वोट लेकर चर्चा में आए थे। पार्टी ने इस रणनीति के तहत मुस्लिम चेहरा को मौका दिया है, जिससे अजय प्रताप और विजय प्रकाश को इस बार टिकट नहीं मिला। हालांकि, दोनों नेताओं ने बागी तेवर अपनाए बिना शमशाद आलम की जीत सुनिश्चित कराने के लिए कार्यकर्ताओं को टिप्स भी दी।
वहीं, सिकंदरा सीट से तीन बार विधायक रहे सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी भी इस बार कांग्रेस के टिकट से बाहर रह गए हैं। कांग्रेस ने इस बार विनोद चौधरी को टिकट दिया है, जो इस क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। झाझा के पूर्व विधायक रविंद्र यादव खुद चुनावी मैदान से बाहर हैं, लेकिन उनके पुत्र शिवराज यादव बसपा के टिकट पर चुनावी समर में कूदे हैं।
इस प्रकार जमुई की राजनीति में इस बार बदलाव साफ नजर आ रहा है, जहां पुराने चेहरे से हटकर नए और युवा चेहरे चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। टिकट वितरण के फैसले ने क्षेत्रीय समीकरणों को भी प्रभावित किया है और आगामी चुनावों में इन बदलावों का असर पड़ना तय है।