सिटी पोस्ट लाइव :10 साल बाद बाहुबली नेता पूर्व विधायक अनंत सिंह की JDU में वापसी होने जा रही है.केंद्रीय मंत्री और JDU के सीनियर लीडर ललन सिंह 100 गाड़ियों के काफिले के साथ अनंत सिंह को लेकर मोकामा विधानसभा क्षेत्र में 50 किमी रोड शो कर चुके हैं.अनंत सिंह अपने दोनों बेटों अभिषेक और अंकित के साथ मंत्री अशोक चौधरी के घर पर CM नीतीश कुमार से मिल चुके हैं.उन्हें मोकामा से टिकेट का आश्वासन और उनके दोनों बेटों ने CM का आशीर्वाद मिल चूका है.
2015 में पहली बार अनंत सिंह को विधायक निवास से गिरफ्तार कर लिया गया. तब भी नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे. अनंत सिंह को पुटुस हत्याकांड में आरोपी बनाया गया था. 18 जून 2015 को छेड़खानी के विवाद में उसकी हत्या कर दी गई थी.यही मौका था जब नीतीश के खास रहे अनंत सिंह उनसे बागी हो गए. JDU का साथ छोड़कर वे निर्दलीय चुनाव में उतर गए. इस अदावत का असर 2019 के लोकसभा और 2020 के विधानसभा चुनाव में दिखा. माना गया कि अनंत सिंह वाले मामले की वजह से भूमिहार कम्युनिटी भी नीतीश सरकार से नाराज हो गई. 2020 के विधानसभा चुनाव में JDU के 43 सीटों पर सिमटने की वजहों में बड़ा फैक्टर भूमिहारों की नाराजगी को भी माना गया.
2019 से 2025 के बीच अनंत सिंह दो बार गिरफ्तार किए गए. जेल जाने के बाद भी अनंत सिंह का सियासी रसूख कम नहीं हुआ. 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव वे जेल में रहते हुए निर्दलीय चुनाव जीते.2022 में सजा की वजह से उनकी सदस्यता गई, तो जेल में रहते हुए पत्नी नीलम देवी को RJD के टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़वाया. नीलम देवी भी चुनाव जीत गईं.इसके बाद उन्होंने अपने करीबी मास्टर कार्तिक को MLC चुनाव जितवाया. सिर्फ चुनाव ही नहीं जितवाया, बल्कि महागठबंधन की सरकार में कार्तिक को मंत्री भी बनवाया. लेकिन क्रिमिनल केस की वजह से कार्तिक को 5 दिन में ही इस्तीफा देना पड़ा था.
अनंत सिंह पहली बार 2005 में मोकामा से JDU के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़े थे. इसके बाद आज तक इस सीट पर उनका या उनसे परिवार का कब्जा है. 2005 में अनंत सिंह लोजपा के नलिनी रंजन शर्मा उर्फ ललन सिंह को हराकर पहली बार विधायक बने.2010 में भी JDU के टिकट पर जीते. इस बीच नीतीश के साथ अनंत सिंह का कद भी बढ़ता गया. 2015 और 2020 में वे निर्दलीय चुनाव जीते. 2022 उपचुनाव में पत्नी नीलम देवी मोकामा से विधायक बनीं.
‘अनंत सिंह आज ललन सिंह की जरूरत और मजबूरी दोनों हैं. ललन सिंह मुंगेर के सांसद हैं. मोकामा सीट इसी इलाके में आती है. अनंत सिंह उनके लिए कितने जरूरी हैं, इसका अंदाजा 2024 के लोकसभा चुनाव में ही हो गया था. तब पैरोल पर जेल से बाहर आए अनंत सिंह ने घूम-घूमकर ललन सिंह के लिए प्रचार किया था.’‘अनंत सिंह को भले बाहुबली या कुछ भी कहा जाए, लेकिन मौजूदा समय में वे भूमिहारों के बड़े लीडर हैं. JDU भी भूमिहार नेता के तौर पर उनका इस्तेमाल करते रही है.
लालू प्रसाद यादव बैकवर्ड पॉलिटिक्स के माहिर खिलाड़ी हैं. लोकसभा चुनाव में उन्होंने अशोक महतो के जरिए पिछड़ों को गोलबंद करने की कोशिश की थी. सवर्णों में अनंत सिंह की जैसी छवि है, वही पिछड़ों में अशोक महतो की है. ऐसे में अनंत सिंह सिर्फ ललन सिंह के ही नहीं JDU के लिए भी मजबूरी हैं.अनंत सिंह चुनाव भले मोकामा से लड़ते हैं, लेकिन उनका घर बाढ़ में है. अगड़ा-पिछड़ा पॉलिटिक्स के कारण कुछ हद तक लखीसराय और बरबीघा के इलाके में भी उनकी अहमियत बढ़ गई है.अगड़ा-पिछड़ा कार्ड से ही मोकामा में पिछड़े अनंत सिंह.लालू यादव ने बिहार के जिस इलाके में अगड़ा के खिलाफ पिछड़ा कार्ड को इस्तेमाल किया था उसमें सबसे ज्यादा चर्चा मोकामा की रही थी. लोकसभा चुनाव के दौरान यहां ललन सिंह के खिलाफ उन्होंने अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी को उतार दिया था.
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 5 मई 2024 को 5 साल बाद अनंत सिंह खानदानी जमीन के बंटवारे के लिए जेल से बाहर निकले. मुंगेर में चुनाव से ठीक 8 दिन पहले जेल से बाहर निकले अनंत सिंह काफिले के साथ इलाके में घूमने लगे. बातें होने लगीं कि ललन सिंह को ताकत देने के लिए अनंत सिंह को बाहर निकाला गया है.ललन सिंह मुंगेर लोकसभा सीट से चुनाव जीत गए, लेकिन अनंत सिंह के जेल से बाहर आने से उन्हें फायदे से ज्यादा घाटा हुआ. सबसे ज्यादा नुकसान भूमिहारों के गढ़ माने जाने वाले मोकामा विधानसभा सीट से ही हुआ. यहां वे अशोक महतो की पत्नी से 1079 वोट से पीछे रह गए.
अनंत सिंह के जेल जाने के बाद सोनू-मोनू नाम के दो भाई मोकामा में अपना वर्चस्व बनाने लगे थे. पैसे के मामले में उन्होंने अनंत सिंह का फैसला मानने से इनकार किया.22 जनवरी, 2025 को सोनू-मोनू के घर पर हमला हुआ. दोनों तरफ से गोलियां चलने लगी. दोनों तरफ से मामले दर्ज कराए गए. सोनू-मोनू ने अनंत सिंह को चैलेंज किया. इस मामले में अनंत सिंह को 7 महीने जेल में रहना पड़ा. दूसरे पक्ष के लोग भी जेल गए.गोलीकांड का चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा.अनंत सिंह के साथ भूमिहार समाज तो खड़ा है ही पिछड़े और गरीब लोगों के बीच भी उनकी लोकप्रियता है.
मुंगेर, लखीसराय, पटना और शेखपुरा जिलों की 9 विधानसभा सीटों पर भूमिहारों का सीधा असर है. मौजूदा समय में जमलापुर, लखीसराय, बरबीघा और मोकामा के विधायक भी भूमिहार हैं.बाढ़ के विधायक राजपूत कम्युनिटी से हैं. सूर्यगढ़ा, शेखपुरा और मुंगेर में यादव विधायक हैं. तारापुर के विधायक कोइरी समुदाय से हैं. ये वे इलाके हैं, जहां अगड़ा वर्सेज पिछड़ा की सियासत हमेशा से रही है.ऐसे में अनंत सिंह चुनाव में बहुत जरुरी हैं. ललन सिंह का साथ मिल जाने से अनंत सिंह और ज्यादा प्रभावशाली बनकर उभर सकते हैं.