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पटना। बिहार में आगामी 2025 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेता जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए अलग-अलग तरीकों का सहारा ले रहे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार की “पलायन रोको – रोजगार दो” यात्रा के जवाब में, जदयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री वीरेंद्र सिंह कुशवाहा ने भी अपनी पदयात्रा शुरू कर दी है। उन्होंने इसे सुशासन और विकास के समर्थन में जनता की पदयात्रा बताया है।

सुशासन के समर्थन में जदयू की पदयात्रा
वीरेंद्र सिंह कुशवाहा ने नरकटिया विधानसभा क्षेत्र में अपनी पदयात्रा जारी रखते हुए तीसरे दिन बनकटवा प्रखंड से छौड़ादानो तक हजारों समर्थकों के साथ यात्रा निकाली। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और कन्हैया कुमार की पदयात्रा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में सुशासन कायम है, और इस सरकार के खिलाफ कोई भी पदयात्रा सफल नहीं हो सकती। उन्होंने कन्हैया कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है, जिसका जनता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

कांग्रेस पर तीखा हमला
पूर्व शिक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वही पार्टी है जिसने अतीत में बिहार में अपराध और नरसंहार को बढ़ावा दिया था। आज वही पार्टी सुशासन के खिलाफ पदयात्रा निकालकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है और सुशासन के साथ खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि उनकी यात्रा में जितने लोग शामिल हो रहे हैं, कन्हैया कुमार की यात्रा में उसकी आधी संख्या भी नहीं दिख रही। इससे स्पष्ट है कि बिहार की जनता सुशासन और विकास के पक्ष में है और कन्हैया कुमार की पदयात्रा का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
जनता का समर्थन और चुनावी रणनीति
वीरेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि उनकी यह पदयात्रा जनता का समर्थन जुटाने के लिए नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब भावनात्मक नारों से प्रभावित नहीं होती, बल्कि जमीनी हकीकत को देखती है। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान लोगों से संवाद करते हुए बताया कि कैसे सुशासन की सरकार ने अपराध पर लगाम लगाई, सड़कें बनाई, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंचाई और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया।

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में इस तरह की पदयात्राओं का मकसद जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना और आगामी चुनाव के लिए माहौल तैयार करना है। एक तरफ जहां कन्हैया कुमार युवाओं को रोजगार और पलायन के मुद्दे पर जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जदयू अपनी सुशासन की नीति को जनता के सामने रखने का प्रयास कर रही है।
बिहार में बढ़ती इस राजनीतिक गतिविधि से साफ है कि आगामी विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है। जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए नेता अब अलग-अलग रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक रस्साकशी में और भी रोचक मोड़ आ सकते हैं।