ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया भ्रम दूर, विपक्ष पर भ्रामक प्रचार का आरोप : संचार साथी ऐप वैकल्पिक, डिलीट करना संभव

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
केंद्र सरकार द्वारा स्मार्टफोन निर्माताओं को नए उपकरणों में ‘संचार साथी’ ऐप प्री-इंस्टॉल करने के निर्देश दिए जाने के बाद उत्पन्न हुए विवाद को लेकर सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को साफ किया कि यह ऐप पूरी तरह से वैकल्पिक (Optional) होगा और इसे किसी भी अन्य ऐप की तरह मोबाइल फोन से हटाया (Delete) जा सकता है। उन्होंने विपक्ष पर इस संवेदनशील मुद्दे पर लोगों को भ्रमित करने का आरोप लगाया।

सिंधिया ने दिया स्पष्टीकरण: बाध्यकारी नहीं है ऐप
विपक्ष और गोपनीयता समूहों के विरोध के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सभी भ्रमों को दूर करते हुए कहा, “विपक्ष संचार साथी ऐप को लेकर लोगों को भ्रमित कर रहा है। यह ऐप पूरी तरह से वैकल्पिक है; आप इसे रखना चाहें तो रखें, हटाना चाहें तो हटा दें। यह एक बाध्यकारी ऐप नहीं है।”

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उन्होंने जोर देकर कहा कि यह ऐप सिर्फ उपभोक्ताओं को सुरक्षा देने के उद्देश्य से लाया गया है, न कि निगरानी के लिए। सिंधिया ने कहा, “यह ऐप जासूसी या कॉल मॉनिटरिंग को सक्षम नहीं करता है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम इस ऐप को सभी के सामने पेश करें। इसे अपने डिवाइस पर रखना या नहीं रखना उपयोगकर्ता पर निर्भर करता है।”

विपक्ष पर साधा निशाना
विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए सिंधिया ने कहा कि जब उनके पास कोई वास्तविक मुद्दा नहीं होता है, तो वे कुछ न कुछ खोजने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के बयान का उल्लेख किया, जिन्होंने इस ऐप को ‘जासूस ऐप’ करार दिया था और नागरिकों के प्राइवेसी के अधिकार पर जोर दिया था।

सिंधिया ने कहा, “हमारा काम उपभोक्ताओं की मदद करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। संचार साथी ऐप हर उपभोक्ता को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम बनाता है।”

उपभोक्ताओं को सुरक्षा देने में ऐप की सफलता
केंद्रीय मंत्री ने संचार साथी पोर्टल और ऐप की सफलता को दर्शाते हुए आंकड़े साझा किए, जिसके अनुसार पोर्टल को 20 करोड़ से अधिक बार एक्सेस किया गया है और ऐप को 1.5 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया गया है; इसके अतिरिक्त, इस पहल की मदद से लगभग 1.75 करोड़ धोखाधड़ी वाले मोबाइल कनेक्शनों को डिस्कनेक्ट किया गया है, जबकि 20 लाख चोरी हुए फोन का पता लगाया गया है और उनमें से लगभग 7.5 लाख चोरी हुए फोन उनके उपभोक्ताओं को सफलतापूर्वक सौंप दिए गए हैं, जिसके आधार पर सिंधिया ने जोर देकर कहा कि यह ऐप फ्रॉड से बचाने और खोए हुए फोन को वापस दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

विपक्ष ने किया था विरोध
दूरसंचार विभाग (DoT) ने 28 नवंबर को मोबाइल हैंडसेट विनिर्माताओं और आयातकों को निर्देश दिया था कि वे 90 दिन के भीतर सभी नए उपकरणों में धोखाधड़ी की सूचना देने वाला संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल करें। इसके तुरंत बाद, विरोध शुरू हो गया। सीपीआई-एम सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा था कि संचार साथी ऐप लोगों की प्राइवेसी में खुला दखल है और यह सुप्रीम कोर्ट के 2017 के पुट्टास्वामी जजमेंट का उल्लंघन करता है, जिसने गोपनीयता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना था।

संचार साथी ऐप क्या है?
संचार साथी भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) की एक नागरिक-केंद्रित पहल है। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य मोबाइल उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाना, उनकी सुरक्षा मजबूत करना और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह लोगों को मोबाइल फ्रॉड से बचाने में मदद करता है।

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