बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार के बीच जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह एक विवादित बयान को लेकर फंसते नजर आ रहे हैं। मोकामा में दिए गए बयान पर चुनाव आयोग ने उन्हें आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का नोटिस भेजा है। आयोग ने उनसे 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर वोटरों को धमकाते हुए नजर आ रहे हैं। अब सवाल यह है कि ऐसे मामलों में चुनाव आयोग के पास क्या-क्या कार्रवाई के अधिकार होते हैं?
भारतीय लोकतंत्र की नींव स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों पर टिकी है। चुनाव आयोग द्वारा लागू की गई आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct – MCC) इसी उद्देश्य को साकार करने का प्रमुख हथियार है। यह संहिता न केवल उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के आचरण को नियंत्रित करती है, बल्कि मतदाताओं को किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव या अनुचित प्रभाव से मुक्त रखने का दायित्व भी निर्धारित करती है। मतदाताओं को धमकाना न केवल आचार संहिता का घोर उल्लंघन है, बल्कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत एक स्पष्ट आपराधिक अपराध भी है। चुनाव आयोग की भूमिका, कानूनी प्रावधानों और वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से समझाता है कि कैसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।
आचार संहिता का उल्लंघन: चुनाव आयोग की त्वरित कार्रवाई
चुनाव आयोग मतदाता धमकी को भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में रखता है। जैसे ही कोई शिकायत दर्ज होती है या स्वत: संज्ञान लिया जाता है, आयोग की प्रक्रिया शुरू हो जाती है:
स्पष्टीकरण और नोटिस: आरोपी उम्मीदवार या नेता से 24-48 घंटों के भीतर लिखित जवाब मांगा जाता है।
असंतोषजनक जवाब पर कार्रवाई:
चेतावनी जारी करना।
प्रचार पर प्रतिबंध (रैलियां, सोशल मीडिया, विज्ञापन)।
गंभीर मामलों में अयोग्यता (Disqualification) – जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8A के तहत 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने पर रोक।
इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता के तहत भी मतदाताओं को धमकाना या अनुचित प्रभाव डालना एक दंडनीय अपराध है। नई न्याय संहिता की धारा 174 अनुचित प्रभाव” (Undue Influence) से संबंधित है, जिसके तहत चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का दबाव बनाने या मतदाता की स्वतंत्रता को बाधित करने वाले व्यक्ति को 1 वर्ष तक की सजा, जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। वहीं धारा 351 आपराधिक धमकी को वर्गीकृत करती है। इसके तहत यदि धमकी किसी व्यक्ति के शरीर, संपत्ति या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की हो, तो दोषी को 2 वर्ष तक की कैद, जुर्माना, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।