एक्शन मे हैं कन्हैया कुमार, बोले-बिच्छू का स्वभाव डंक मारना,साधू का स्वभाव है उसे बचाना.

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By Rahul

फिर उठी ‘जात की बात’, कन्हैया ने इस दफे छेड़ा ’65’ वाला राग

सिटी पोस्ट लाइव : कांग्रेस नेता और जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार एकबार फिर से बिहार मे एक्शन मे नजर आ रहे हैं. शनिवार को बिहार के सुपौल में  सामाजिक न्याय संवाद कार्यक्रम में पहुंचे कन्हैया कुमार ने कहा कि बिहार जैसे राज्य में सबसे बड़ी जरूरत रोजगार, न्याय और समान भागीदारी की है.  कन्हैया कुमार ने एक बार फिर से जात की बात का राग अलापा.  कन्हैया कुमार ने कहा कि जब तक जाति जनगणना नहीं होगी, तब तक यह नहीं पता चल सकेगा कि किसे क्या मिल रहा है और किसे क्या मिलना चाहिए.

कन्हैया कुमार ने कहा कि अगर किसी समाज की जनसंख्या 65 प्रतिशत है, तो उसे 65 प्रतिशत भागीदारी भी मिलनी चाहिए.  उन्होंने सरकारी नौकरियों में 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा हटाने की मांग करते हुए कहा कि समान अवसर और न्याय की नींव तभी मजबूत होगी जब हर वर्ग को उसके हिस्से का अधिकार मिलेगा.कन्हैया कुमार ने केंद्र सरकार और सत्ताधारी दलों पर भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कुछ लोग समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस मोहब्बत से दिलों को जोड़ने का कार्य कर रही है.

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उन्होंने एक कहानी सुनाई, ‘एक संत नदी में नहा रहे थे.  उन्होंने देखा कि एक बिच्छू डूब रहा है.  संत ने उसे बचाने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन बिच्छू ने डंक मार दिया.  शिष्य ने कहा कि वह तो डंक मारेगा ही, लेकिन संत ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि बिच्छू का स्वभाव डंक मारना है और मेरा स्वभाव है उसे बचाना. ‘ इस कहानी के जरिए कन्हैया ने यह संदेश दिया कि नफरत फैलाने वालों का स्वभाव बांटने का होता है, लेकिन जो लोग सच्चे अर्थों में धर्म, दर्शन और इंसानियत को समझते हैं, वे जोड़ने का काम करते हैं.


कन्हैया कुमार ने कहा, ‘अगर कोई मंदिर जाता है, तो मंदिर में झंडा लगाए, मस्जिद जाने वाला मस्जिद में लगाए.  लेकिन किसी को मजबूर क्यों किया जा रहा है कि वह दूसरे धर्मस्थल में झंडा लगाए? यह सब लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश है.  जो आज सत्ता में बैठे हैं, वे लोकतंत्र का गला घोंटने का काम कर रहे हैं, लेकिन जनता अब जागरूक है और वह नफरत के एजेंडे को नकारेगी. ‘

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