सिटी पोस्ट लाइव
5 जनवरी 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की याचिका पर अहम सुनवाई हो रही है। यह सुनवाई उनके खिलाफ दर्ज IRCTC टेंडर और ‘लैंड फॉर जॉब’ मामलों से संबंधित है, जिसमें उन्हें और उनके परिवार के अन्य सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
लालू प्रसाद यादव ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। यह सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की कोर्ट में हो रही है और इसे इस मामले की कानूनी दिशा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामला अक्टूबर 2025 का है, जब राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय किए थे। आरोपों में कहा गया था कि लालू यादव ने अपने केंद्रीय रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) से जुड़ी जमीनों और होटलों को निजी कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए पट्टे पर देने में भूमिका निभाई।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि लालू यादव इस साजिश और अनियमितताओं से पूरी तरह अवगत थे और उन्होंने सक्रिय रूप से इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। आरोपों में यह भी कहा गया कि लालू यादव ने भूमि निविदा प्रक्रिया में पात्रता शर्तों में हेरफेर कर सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग किया।
इस मामले में लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव पर भी आरोप हैं। आरोपों में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, और सरकारी प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसी गंभीर धाराएँ शामिल हैं। ‘लैंड फॉर जॉब’ और IRCTC टेंडर मामलों के पीछे की पृष्ठभूमि यह है कि रेलवे में कथित अनियमित नियुक्तियां और जमीन के गलत उपयोग के मामले सामने आए थे। इन मामलों में CBI और ED दोनों जांच कर रहे हैं।
आज की सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला काफी संवेदनशील है, क्योंकि लालू प्रसाद यादव भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके परिवार के सदस्य भी सक्रिय हैं। यह सुनवाई केवल कानूनी दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।