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बिहार विधानसभा चुनाव 2026 में मिली करारी शिकस्त के बाद अब कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं। सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है कि बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है। केवल शीर्ष नेतृत्व ही नहीं, बल्कि अल्लावरु और राजेश राम के कार्यकाल में नियुक्त किए गए सभी जिलाध्यक्षों को भी हटाने की तैयारी चल रही है। इस संभावित फेरबदल ने बिहार की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
शर्मनाक हार ने बदली आलाकमान की सोच
हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। गठबंधन के तहत 61 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी महज 6 सीटों पर सिमट गई। इस हार ने राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले कृष्णा अल्लावरु और राजेश राम की रणनीति पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। दिल्ली में 27 नवंबर 2025 और 24 जनवरी 2026 को हुई समीक्षा बैठकों (Review Meetings) में यह निष्कर्ष निकाला गया कि संगठन जमीनी स्तर पर विफल रहा है, जिसके बाद अब डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हो गई है।
पुराने ‘कोर वोट बैंक’ की ओर वापसी
कांग्रेस अब अपने उस पारंपरिक सामाजिक समीकरण की ओर लौटने की योजना बना रही है, जिसके दम पर वह 1990 तक बिहार की सत्ता में काबिज थी। पार्टी अब EBC-OBC पर अत्यधिक निर्भरता कम कर ब्राह्मण, भूमिहार, दलित और मुस्लिम (44% आबादी) गठबंधन पर फोकस करेगी। वर्तमान में ये वोट बैंक भाजपा समर्थित एनडीए और राजद के बीच बंटे हुए हैं। माना जा रहा है कि नया प्रदेश अध्यक्ष किसी सवर्ण चेहरे को बनाया जा सकता है, जबकि संगठन में दलितों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।
नेशनल सर्च कमेटी करेगी नए अध्यक्ष का फैसला
विवादों से बचने के लिए पार्टी इस बार प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए एक नेशनल सर्च कमेटी का गठन करने जा रही है। यह कमेटी 5-6 नामों का पैनल आलाकमान को भेजेगी। साथ ही, जिलों में 29 नेशनल ऑब्जर्वर भेजे गए हैं जो कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर नए जिलाध्यक्षों के नाम शॉर्टलिस्ट करेंगे। फरवरी के अंत तक जिलाध्यक्षों और जून से पहले नए प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति की प्रबल संभावना है।