शिक्षा विभाग की सख्त हिदायतों के बावजूद सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षक ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (APAAR) को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। लगातार चेतावनी के बाद भी बड़ी संख्या में नामांकित बच्चों की APAAR आईडी जेनरेट नहीं हो सकी है, जिसके चलते अब शिक्षा विभाग लापरवाह शिक्षकों और स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
सीतामढ़ी जिले के स्कूलों में पढ़ने वाले अब भी बड़ी संख्या में बच्चे APAAR आईडी से बाहर हैं। जिले में नामांकित कुल 6,63,347 छात्रों में से अब तक केवल 3,21,159 बच्चों की ही यह आईडी सफलतापूर्वक जेनरेट हो सकी है, जबकि 3 लाख 42 हजार बच्चे अब भी इससे वंचित हैं। इनमें 2,460 बच्चों की आईडी फेल हो गई है और 3,39,692 बच्चों का आवेदन लंबित है। दरअसल, आईडी न बनने से छात्र छात्रवृत्ति, पुस्तकालय और संग्रहालयों में प्रवेश, डिजिटल मार्कशीट व प्रमाणपत्र तथा भविष्य की उच्च शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं से वंचित हो सकते हैं। इसके बावजूद सैकड़ों स्कूलों के प्रधान शिक्षक उदासीन बने हुए हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग अब ऐसे लापरवाह प्रधान शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है। डीपीओ प्रियदर्शी सौरभ ने स्पष्ट किया कि APAAR आईडी केवल छात्र की पहचान नहीं, बल्कि नई शिक्षा नीति के तहत उनकी पूरी शैक्षणिक यात्रा का डिजिटल पासबुक है, और इसे हर नामांकित छात्र के लिए अनिवार्य रूप से बनाया जाना है।
गौरतलब है कि डीपीओ ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों के प्रधान शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रत्येक छात्र-छात्रा का यह आईडी बनाना अनिवार्य है। अपर मुख्य सचिव स्तर पर भी यह आईडी निर्माण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई है और विद्यालयों को शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने को कहा गया है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में पूर्ण उपलब्धि हासिल नहीं होती है, तो संबंधित प्रधान शिक्षक और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विशेष रूप से निजी स्कूलों की स्थिति पर नाराजगी जताई गई है। निजी विद्यालयों में नामांकित 89,302 छात्रों में से अब तक केवल 20,073 की ही APAAR आईडी जेनरेट हो सकी है, जबकि 69,028 छात्र-छात्राएं इससे वंचित हैं। इसे लेकर भारत सरकार की सतत समीक्षा में भी खेद व्यक्त किया गया है। इसके बाद निजी स्कूलों के संचालकों और प्राचार्यों को निर्देश जारी कर तुरंत APAAR आईडी निर्माण कार्य पूरा करने को कहा गया है।