नालंदा की हिलसा नगर परिषद बनी बिहार की प्रेरणा: कचरे से बना रही जैविक खाद, पर्यावरण संरक्षण में नई मिसाल

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के नालंदा जिले का एक छोटा सा नगर अब कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में पूरे राज्य के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है। हिलसा नगर परिषद ने शहरी कचरे के सदुपयोग के लिए जो मॉडल अपनाया है, वह न केवल कचरे को मूल्य में बदल रहा है, बल्कि किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

नगर परिषद द्वारा स्थापित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) केंद्र पर प्रतिदिन एकत्र किए गए गीले और सूखे कचरे को वैज्ञानिक तरीके से पृथक कर, उसका उपयोग उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनाने में किया जा रहा है। परिषद के स्वास्थ्य पदाधिकारी उज्ज्वल आनंद के अनुसार, गोबर, गुड़ और विशेष प्रकार के डीकंपोजर की मदद से इस खाद को 45 दिनों में तैयार किया जाता है। यह खाद पूरी तरह से प्राकृतिक, रसायनमुक्त और पर्यावरण के अनुकूल है।

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सबसे खास बात यह है कि यह जैविक खाद केवल ₹6 प्रति किलोग्राम की दर से स्थानीय किसानों और बागवानी प्रेमियों को उपलब्ध कराई जा रही है। इसके प्रति किसानों की बढ़ती रुचि इस बात की पुष्टि करती है कि अब रासायनिक उर्वरकों की जगह प्राकृतिक विकल्प अपनाए जा रहे हैं। पटना से लेकर रांची तक इसकी मांग पहुँच चुकी है।

इस पहल से न केवल कचरे का सही प्रबंधन सुनिश्चित हुआ है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता, जल स्रोतों की शुद्धता और वायु की स्वच्छता को भी बल मिला है। हिलसा का यह मॉडल अब प्रदेश के अन्य शहरी निकायों के लिए एक आदर्श उदाहरण बन रहा है। यह प्रयास एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है, वहीं दूसरी ओर यह बताता है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो कचरे से भी भविष्य संवारा जा सकता है।

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