सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (वोटर लिस्ट रिवीजन) को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने इस मुद्दे पर एक बड़ी बैठक की, जिसके बाद उन्होंने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर इस संवेदनशील विषय पर सदन में तत्काल चर्चा कराने की मांग की। महागठबंधन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे सड़क से सदन तक और विधानसभा से लेकर लोकसभा तक इस मुद्दे को नहीं छोड़ेंगे।
महागठबंधन का आरोप है कि चल रहा मतदाता सूची पुनरीक्षण एक “गरीब लोगों के वोट काटने की बड़ी साजिश” है। तेजस्वी यादव ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को किसी भी हालत में इस मुद्दे पर चर्चा करानी होगी, अन्यथा उन्हें इसका जवाब देना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम लोग सड़क से लेकर सदन तक, विधानसभा से लोकसभा तक किसी भी हालत में इस मुद्दे को नहीं छोड़ेंगे क्योंकि यह गरीब लोगों के वोट काटने की एक बड़ी साजिश है।”
महागठबंधन के नेताओं का मानना है कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है और खासकर वंचित वर्ग के मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होती, तो इसे लेकर इतनी आपत्तियां नहीं उठतीं। उन्होंने आशंका जताई कि आगामी चुनावों को प्रभावित करने के लिए यह सब किया जा रहा है।
इस मुद्दे पर महागठबंधन की एकजुटता साफ दिख रही है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष पर दबाव बनाया है कि वे इस गंभीर मामले को संज्ञान में लें और सदन के भीतर इस पर विस्तृत चर्चा कराएं, ताकि सभी आशंकाओं को दूर किया जा सके। यदि विधानसभा अध्यक्ष उनकी मांग को अनसुना करते हैं, तो महागठबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस लड़ाई को सदन के बाहर भी ले जाएंगे और जनता के बीच इस ‘साजिश’ को उजागर करेंगे।
यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस अल्टीमेटम पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या सदन में मतदाता सूची के इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा हो पाती है। महागठबंधन का यह रुख दर्शाता है कि वे इस मुद्दे को हल्के में नहीं लेने वाले हैं और इसे लेकर राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी गरमागरमी देखने को मिल सकती है।