UGC नियमों पर मचे घमासान के बीच घिरे केंद्रीय मंत्री: सवर्ण समाज के विरोध पर सवाल हुआ तो लगाने लगे धार्मिक नारे, वीडियो वायरल

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देश भर में छिड़ी बहस के बीच एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। बिहार के वैशाली जिले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से जब पत्रकारों ने UGC के ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ पर सवर्ण समाज की नाराजगी को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने जवाब देने के बजाय कैमरे के सामने धार्मिक नारे लगाने शुरू कर दिए। मंत्री की इस प्रतिक्रिया का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला?
यह घटना उस समय की है जब केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय हाजीपुर स्थित कौनहारा घाट पर ‘गजग्राह’ की मूर्ति के शिलान्यास और अनावरण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। पूजा-अर्चना के बाद जैसे ही वह पत्रकारों के रूबरू हुए, उनसे UGC के नए नियमों पर सवाल किया गया। सवाल सुनते ही मंत्री असहज नजर आए और किसी नीतिगत स्पष्टीकरण के बजाय ‘हर-हर महादेव’, ‘भारत माता की जय’ और ‘भगवान विष्णु की जय’ के नारे लगाने लगे। पत्रकारों ने जब सवाल दोहराया, तब भी उन्होंने चुप्पी नहीं तोड़ी और नारे लगाते हुए आगे बढ़ गए।

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UGC के किन नियमों पर है विवाद?
UGC द्वारा 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026’ का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांगों के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है, जिसके तहत प्रत्येक कॉलेज और विश्वविद्यालय में 9 सदस्यीय ‘समानता समिति’ (Equity Committee) गठित करने का अनिवार्य प्रावधान है। हालांकि, विवाद का मुख्य कारण समिति की 9 में से कम से कम 5 सीटों का आरक्षित वर्गों के लिए अनिवार्य होना है, जिस पर सवर्ण समाज और सामान्य वर्ग के संगठनों ने यह आरोप लगाते हुए विरोध जताया है कि इसमें जनरल कैटेगरी के प्रतिनिधित्व के लिए कोई ठोस कोटा या स्पष्ट प्रावधान नहीं रखा गया है, जिससे उनके हितों की अनदेखी होने का खतरा बना रहेगा।

विपक्ष और समाज का रुख
मंत्री की चुप्पी ने इस विवाद को और हवा दे दी है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि संवेदनशील नीतिगत मुद्दों पर सरकार धार्मिक नारों की ओट क्यों ले रही है? सवर्ण संगठनों का कहना है कि समानता के नाम पर लाए गए नियम अगर एक वर्ग को पूरी तरह हाशिए पर धकेल देंगे, तो इससे संस्थानों में असंतोष बढ़ेगा। फिलहाल, इस वायरल वीडियो ने केंद्र सरकार के लिए एक नई असहज स्थिति पैदा कर दी है।

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