भाजपा से निष्कासन के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री ने तोड़ी भाषाई मर्यादा : “आंख निकालकर सबके सामने नंगा कर दूंगा”,

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
भारतीय जनता पार्टी (BJP) से निष्कासन और इस्तीफे के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह इन दिनों लगातार अपने विवादित बयानों के कारण राजनीतिक सुर्खियों में छाए हुए हैं। पार्टी नेतृत्व पर हमलावर रहे आर.के. सिंह ने अब मीडिया के सामने बातचीत में भाषाई मर्यादा की सीमा को लांघ दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है।

आर.के. सिंह ने अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए एक व्यक्ति विशेष या समूह को निशाना बनाते हुए कहा कि यदि कोई उन्हें डराने की कोशिश करेगा, तो वह उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने बेहद आपत्तिजनक और हिंसात्मक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “कोई डरना चाहे तो वह मुझे डरा ले, मैं डरने वाला नहीं हूं।” इसके बाद उनका गुस्सा चरम पर पहुँच गया और उन्होंने कहा, “कोई मुझे डराना चाहेगा, तो दो उंगली उसके आंखों में डाल दूंगा और उंगली टेढ़ा कर उसकी आंख निकाल लूंगा। ये लोग मुंह छुपाने तक की जगह नहीं पाएंगे। मैं दूसरे तरह का आदमी हूं।” उनके बयान में अपशब्दों का भी प्रयोग किया गया, जिन्हें टीवी चैनलों को बीप करके प्रसारित करना पड़ा।

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विपक्ष ने बताया ‘आंतरिक विद्रोह’
आर.के. सिंह का यह आक्रामक अंदाज़ भाजपा समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों दोनों के लिए चौंकाने वाला है। विपक्ष इस घटना को भाजपा के भीतर ‘बढ़ती असहमति और विद्रोह’ के परिणाम के रूप में देख रहा है। उनका कहना है कि यह बयान पार्टी के अंदरूनी कलह और असंतोष को दर्शाता है।

दूसरी ओर, भाजपा ने आधिकारिक तौर पर इन बयानों से पल्ला झाड़ लिया है। पार्टी ने कहा है कि वह अनुशासन और लोकतांत्रिक मर्यादा में विश्वास रखती है, और इस तरह की आपत्तिजनक भाषा और हिंसात्मक बयानबाजी बिल्कुल भी अस्वीकार्य है। भाजपा के भीतर भी कई नेताओं ने नाम न लेने की शर्त पर कहा है कि राजनीति में व्यक्तिगत हमले और इस तरह की तल्ख भाषा किसी भी स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

नाराज़गी की वजह क्या?
आर.के. सिंह की इस अत्यधिक नाराज़गी और हमलावर रुख के पीछे की वजह को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे बिहार की सत्ता-समीकरणों में उन्हें अपनी उपेक्षा होने की आशंका या भूमिका न मिलने की निराशा का परिणाम बता रहे हैं। वहीं, कुछ जानकार इसे उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से जोड़कर देख रहे हैं, जो पूरी नहीं हो सकीं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री के इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी जमकर आलोचना बटोरी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक वरिष्ठ नेता द्वारा सार्वजनिक रूप से इस तरह के तीखे और हिंसात्मक शब्दों का इस्तेमाल राजनीतिक मर्यादा की किस सीमा को दर्शाता है।

भाजपा अब आर.के. सिंह के इस्तीफे और निष्कासन को एक ‘बंद अध्याय’ मानकर आगे बढ़ना चाहती है, लेकिन विपक्ष इस घटना को भुनाने में लगा है। आर.के. सिंह ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वे आगे किस राजनीतिक दल में शामिल होंगे या स्वतंत्र रूप से अपना सफर जारी रखेंगे। लेकिन उनके इस आक्रामक रूख से यह साफ है कि वह फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं हैं और आने वाले दिनों में उनके बयान बिहार की राजनीति में और हलचल मचा सकते हैं।

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