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पटना: जेडीयू के नेता उत्साहित हैं। उन्हें लग रहा है कि अब चुनाव की बैतरणी नीतीश कुमार के 70 हज़ार वाले कार्ड से आसानी से पार हो जाएगी। क्या है नीतीश कुमार का यह 70 हज़ार वाला कार्ड और यह कैसे हर जाति के वोट छीनकर जेडीयू के उम्मीदवारों को देगा, इससे जुड़ी हर बात हम आपको बताएंगे। दरअसल, नीतीश कुमार की चुनावी जीत और उनके यूएसपी को बढ़ाने में बिहार की महिलाओं का बड़ा योगदान है। नीतीश कुमार ने आधी आबादी को आगे लाने में बड़ी भूमिका निभाई है। पंचायत चुनाव में आरक्षण देना हो या शराबबंदी, नीतीश कुमार के इन दो ट्रंप कार्ड के आगे जातीय गणित का ब्रह्मास्त्र भी फ़ेल हो जाता है।
तो इस चुनाव में भी नीतीश कुमार ने आधी आबादी पर दांव खेल दिया है। सीएम नीतीश ने ‘महिला संवाद’ अभियान की शुरुआत की है। पटना से 50 प्रचार वाहन रवाना हो चुके हैं। आज ही बिहार के 600 जगहों पर महिला संवाद कार्यक्रम होंगे और अगले 60 दिनों में पूरे बिहार में 70,000 जगहों पर महिलाओं के लिए कार्यक्रम होंगे। इन 70 हज़ार जगहों पर महिलाओं को अच्छी-खासी संख्या में जुटाया जाएगा और इन 70 हज़ार जगहों की महिलाएं जेडीयू की जीत में बड़ी भूमिका निभाएंगी।
70 हज़ार जगहों पर होने जा रहे ‘महिला संवाद’ के ज़रिए बिहार की दो करोड़ महिलाओं से सीधे कनेक्ट किया जाएगा। इसमें जीविका समूह की लगभग डेढ़ लाख महिलाएं बड़ी भूमिका निभाएंगी जिन्हें नीतीश कुमार का चुनावी दूत भी कहा जाता है। बिहार की महिलाओं को नीतीश सरकार की हर उस योजना की याद दिलाई जाएगी, जिससे उन्हें सीधे तौर पर फ़ायदा मिलता रहा है। जैसे कि शराबबंदी, पंचायत चुनाव, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, नौकरी में आरक्षण, छात्रा पोशाक योजना, जीविका, साइकिल योजना आदि।
तो हम आपको कुछ उन योजनाओं के बारे में बताते हैं जिन पर नीतीश कुमार को भरोसा है। इसमें से कई योजनाएं ऐसी हैं जिन्हें दूसरे राज्यों में भी कॉपी किया गया।
जैसे कि –
73वें संविधान संशोधन (1992) ने पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान। बिहार सरकार ने 2006 में बढ़ाकर 50% कर दिया। पंचायती राज और निकाय के चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने वाला बिहार पहला राज्य बना।
दूसरा सरकारी नौकरी में आरक्षण। नीतीश कुमार सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया। यह ऐतिहासिक कदम था। शराबबंदी के अपने फ़ैसले से तो नीतीश कुमार महिलाओं के हीरो ही बन गए।
इसके बाद नंबर आता है नीतीश कुमार की साइकिल योजना का।
साइकिल ने सिर्फ़ छात्राओं को पहिए ही नहीं दिए, आत्मविश्वास और भरोसा भी दिया। इतना ही नहीं, ग्रेजुएशन करने वाली छात्राओं को 50 हजार रुपए देने वाली योजना से तो कई बच्चियों के सपने सच हो गए। इससे उन्हें आगे पढ़ने का रास्ता खुला। अब इन्हीं महिलाओं का नीतीश कुमार की बसें दरवाज़ा खटखटाएगी और समर्थन मांगेगी।