भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन गुरुवार को पटना पहुंच गए हैं। वे बिहार के नए राज्यपाल के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे। उनका शपथ ग्रहण समारोह 14 मार्च को राजभवन (लोक भवन) में आयोजित किया जाएगा, जहाँ पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।

सैयद अता हसनैन का व्यक्तित्व सैन्य वीरता और बौद्धिक गहराई का मिश्रण है। उन्होंने श्रीनगर स्थित सेना की महत्वपूर्ण 15वीं कोर (चिनार कोर) का नेतृत्व किया। कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों को दिशा देने में उनकी भूमिका निर्णायक रही। सैन्य शक्ति के साथ-साथ उन्होंने स्थानीय लोगों का दिल जीतने की नीति अपनाई। शिक्षा, खेल और रोजगार के माध्यम से कश्मीरी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की उनकी पहल आज भी मिसाल मानी जाती है। वहीं, सेना से सेवानिवृत्ति के बाद वे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य रहे और सुरक्षा एवं रणनीतिक मामलों पर एक प्रखर आवाज बने रहे। वे कश्मीर यूनिवर्सिटी के चांसलर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

बिहार के लिए इस नियुक्ति के मायने;
सैयद अता हसनैन की नियुक्ति को राज्य के प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके पास करीब 40 वर्षों का लंबा सैन्य अनुभव है, जिसका लाभ बिहार को आपदा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मिल सकता है।

एक ऐतिहासिक सिलसिला;
वर्ष 1998 में एआर किदवई के बाद, एक लंबे अंतराल (लगभग 26 साल) के बाद 24 दिसंबर 2024 को आरिफ मोहम्मद खान को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। अब सैयद अता हसनैन के रूप में बिहार को निरंतर दूसरा मुस्लिम राज्यपाल मिला है, जो राज्य के समावेशी दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।