सिर्फ वेतन ही नहीं, भत्ते और वीआईपी सुविधाएं भी हैं खास; जानें एक सांसद पर सरकार हर महीने कितना करती है खर्च…

Ritu Raj

सांसदों के वेतन और सुविधाओं को लेकर अक्सर चर्चाएं गर्म रहती हैं, लेकिन भ्रम दूर करने के लिए सटीक आंकड़ों को जानना जरूरी है। क्या आप जानते हैं कि एक सांसद को मिलने वाली सुविधाएं सिर्फ ‘सैलरी’ तक सीमित नहीं हैं? सबसे पहले यह स्पष्ट कर लें कि लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के बीच वेतन को लेकर कोई भेदभाव नहीं है। संवैधानिक रूप से दोनों सदनों के प्रतिनिधि समान वेतन के हकदार हैं।

मासिक आय का गणित;

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मद (Component)राशि (प्रति माह)विवरण
मूल वेतन (Basic Salary)₹1,00,000यह सांसदों की फिक्स्ड सैलरी है।
निर्वाचन क्षेत्र भत्ता₹70,000क्षेत्र के विकास और जनसंपर्क के लिए।
कार्यालय खर्च भत्ता₹60,000स्टाफ और स्टेशनरी के खर्च हेतु।

हालांकि मूल वेतन 1 लाख रुपये है, लेकिन भत्तों को जोड़कर एक सांसद को मिलने वाली कुल मासिक राशि ₹2,30,000 से अधिक हो जाती है। सोशल मीडिया पर चल रहे ‘1.25 लाख’ के आंकड़े अक्सर मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) के समायोजन को दर्शाते हैं।

अतिरिक्त भत्ते और ‘वीआईपी’ सुविधाएं;
दैनिक भत्ता (Daily Allowance): जब संसद का सत्र चल रहा हो या सांसद किसी समिति की बैठक में शामिल हों, तो उन्हें ₹2,000 प्रति दिन का अलग से भत्ता मिलता है। (बशर्ते उन्होंने रजिस्टर में हस्ताक्षर किए हों)।
आवास और बिजली-पानी: दिल्ली के पॉश इलाकों में टाइप-IV से टाइप-VIII तक के सरकारी बंगले। इसके साथ ही एक निश्चित सीमा तक बिजली और पानी मुफ्त है।
फ्री ट्रैवल (Travel Perk): सांसदों को साल भर में 34 मुफ्त हवाई यात्राएं (देश के भीतर) और ट्रेन में प्रथम श्रेणी (First AC) में असीमित मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है।
स्वास्थ्य सुरक्षा: केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत सांसद और उनके परिवार को देश के बेहतरीन अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलता है।

वेतन तय करने का अधिकार किसके पास है?
सांसदों का वेतन ‘संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954’ के तहत निर्धारित होता है। इसमें बदलाव के लिए संसद में विधेयक पारित किया जाता है। हालिया वर्षों में यह नियम भी बनाया गया है कि प्रत्येक 5 वर्ष में लागत सूचकांक के आधार पर भत्तों में स्वतः संशोधन किया जा सकता है। चाहे राज्यसभा हो या लोकसभा, दोनों ही सदनों के सदस्यों को आर्थिक रूप से समान दर्जा प्राप्त है। यह सुविधाएं इसलिए दी जाती हैं ताकि जनप्रतिनिधि बिना किसी वित्तीय दबाव के अपने क्षेत्र की समस्याओं और देश के नीति-निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

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