पाकिस्तान ने किया संवैधानिक संशोधन, आर्मी चीफ आसिम मुनीर को बनाया तीनो सेनाओ का प्रमुख

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
पाकिस्तान में एक बड़ा संवैधानिक और सैन्य फेरबदल होने जा रहा है। पाकिस्तान सरकार ने रातोंरात एक अहम बिल पेश किया है, जिसके तहत वर्तमान पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर को ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ यानी ‘रक्षा बलों के प्रमुख’ नामक एक नए और बेहद शक्तिशाली पद पर नियुक्त किया जाएगा। इस बदलाव के लिए संविधान के अनुच्छेद 243 में 27वां संशोधन प्रस्तावित किया गया है।

पाक सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत किए गए 27वें संशोधन बिल के तहत, राष्ट्रपति प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर आसिम मुनीर को इस नए पद पर नियुक्त करेंगे। यह कदम पाकिस्तान की तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) को एक ‘सिंगल कमांड’ के अंतर्गत लाने के लिए उठाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य सेना के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करना बताया गया है।

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‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बौखलाहट!
पाकिस्तान के इस आनन-फानन में किए गए संवैधानिक संशोधन के पीछे हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सैन्य अभियान में भारत के हाथों चार दिनों तक मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान ने यह ‘सबक’ लिया है। पिछले महीने भारतीय वायुसेना के एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने खुलासा किया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट समेत कई सैन्य लड़ाकू विमानों को मार गिराया था। जिसके बाद पाकिस्तान को लड़ाई रोकने की गुजारिश करनी पड़ी थी।

माना जा रहा है कि इस सैन्य हार के बाद ही पाकिस्तान सरकार ने पहले आर्मी चीफ आसिम मुनीर को पाक सेना का दूसरा सबसे बड़ा पद ‘फील्ड मार्शल’ दिया था। और अब, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के कुछ ही महीनों बाद, संविधान में संशोधन करके मुनीर को तीनों सेनाओं का प्रमुख बनाया जा रहा है।

क्या है ‘रक्षा बलों के प्रमुख’ का पद?
‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (CDF) का पद आमतौर पर आर्मी चीफ को ही सौंपा जाता है। इस पद पर नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय रणनीतिक कमांड की सलाह पर की जाती है। यह अधिकारी तीनों सेनाओं का प्रमुख कहलाता है। आसिम मुनीर के इस पद पर आसीन होने के बाद उनका प्रभाव पाकिस्तान के रक्षा और रणनीतिक फैसलों में अभूतपूर्व रूप से बढ़ जाएगा। कुछ विश्लेषक इसे आसिम मुनीर को पाकिस्तान का एक तरह का ‘सुप्रीम लीडर’ बनाने की कवायद के रूप में भी देख रहे हैं, जहां वह न सिर्फ सेना से जुड़े बल्कि सरकार को प्रभावित करने वाले फैसले भी लेंगे।

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