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पटना। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार इन दिनों “नौकरी दो, पलायन रोको” यात्रा के तहत पश्चिमी चंपारण के भितिहरवा से अभियान चला रहे हैं, जहां वे युवाओं को कांग्रेस से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी पिछले कई महीनों से बिहार में युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशांत किशोर ने पहले भी अपनी पदयात्रा के माध्यम से जनता से संवाद स्थापित करने की रणनीति अपनाई थी।
बिहार में कांग्रेस की सक्रियता पहले धीमी थी, जिससे प्रशांत किशोर को यहां अपनी राजनीतिक संभावनाएं मजबूत करने का अवसर मिला। लेकिन अब, कन्हैया कुमार की सक्रियता और उनकी धारदार बयानबाजी के कारण युवाओं में कांग्रेस के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। शायद यही कारण है कि प्रशांत किशोर ने पहली बार खुलकर कन्हैया कुमार पर निशाना साधा है और उन्हें एक सीधी चुनौती दी है।
गोपालगंज में एक जनसभा के दौरान प्रशांत किशोर ने कन्हैया कुमार को ललकारते हुए कहा, “अगर उनमें हिम्मत है, तो उस मुख्यमंत्री के खिलाफ एक शब्द बोलकर दिखाएं, जिसने कहा था कि बिहारियों के डीएनए में मजदूरी करना है।” प्रशांत किशोर ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार के लोगों को सिर्फ मजदूरी करने वाला करार दिया था। लेकिन बिहारियों की अस्मिता की बात करने वाले कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।
प्रशांत किशोर का तर्क है कि कन्हैया कुमार और कांग्रेस के अन्य नेता बिहारियों से वोट मांगते हैं, लेकिन जब उनके सम्मान से जुड़ा सवाल आता है, तो वे मौन साध लेते हैं। प्रशांत किशोर की यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में खलबली मचा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की राजनीति में कन्हैया कुमार की एंट्री ने समीकरणों को उलझा दिया है। कांग्रेस के लिए जहां यह नई ऊर्जा का संकेत है, वहीं अन्य दलों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।
प्रशांत किशोर को भी शायद यह महसूस हो रहा है कि कन्हैया कुमार युवाओं को कांग्रेस के पक्ष में लामबंद कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते, वे कन्हैया को अपने राजनीतिक जाल में फंसाने की रणनीति अपना रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि तेज-तर्रार और वाकपटुता के लिए मशहूर कन्हैया कुमार प्रशांत किशोर की इस चुनौती का क्या जवाब देते हैं। क्या वे खुलकर इस मुद्दे पर बोलेंगे या इसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ेंगे? बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में इस टकराव का क्या असर होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।