पीएम मोदी ने असम में रचा नया इतिहास : डिब्रूगढ़ में इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप पर उतरा पीएम का विमान, कुमार भास्कर वर्मा सेतु का भी उद्घाटन

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम के डिब्रूगढ़ में मोरान बाईपास पर नवनिर्मित इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर उतरकर एक नया इतिहास रच दिया। पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की यह पहली रणनीतिक हवाई पट्टी है, जहाँ पहली बार प्रधानमंत्री का विशेष विमान उतरा। इस दौरान पीएम ने भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स का हैरतअंगेज हवाई प्रदर्शन भी देखा।

क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)?
प्रधानमंत्री ने खुद इस परियोजना की जानकारी साझा करते हुए इसे सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बताया। यह ईएलएफ (ELF) भारतीय वायुसेना के सहयोग से विकसित की गई है। यह सामान्य दिनों में नेशनल हाईवे का हिस्सा रहती है, लेकिन युद्ध की स्थिति या प्राकृतिक आपदा के दौरान इसे तत्काल रनवे में तब्दील किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सुविधा ‘स्ट्रेटेजिक जरूरतों’ और ‘इमरजेंसी रिस्पॉन्स’ के लिए पूर्वोत्तर का एक बड़ा एसेट (संपत्ति) साबित होगी।

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कुमार भास्कर वर्मा सेतु: ब्रह्मपुत्र पर बना छह लेन का ‘अजूबा’
असम दौरे के अगले पड़ाव में प्रधानमंत्री ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बने भव्य ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ का उद्घाटन किया। यह पुल न केवल इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है, बल्कि गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच की दूरी को मिनटों में समेट देगा। लगभग 3,300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह पुल 1.24 किलोमीटर लंबा है, जो कुल 8.4 किलोमीटर लंबे एक विशाल कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तकनीक के मामले में यह पूर्वोत्तर भारत का पहला ‘एक्सट्राडोज्ड प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट’ (PSC) पुल है, जिसके निर्माण से न केवल शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि कामाख्या देवी मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी कनेक्टिविटी बेहद आसान हो जाएगी।

विकास और विरासत का संगम
प्रधानमंत्री ने उद्घाटन के बाद तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि यह पुल असम में केवल आवागमन ही नहीं, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार पूर्वोत्तर के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे व्यापार और स्थानीय लोगों का जीवन आसान हो सके।

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