88 मिनट की हाई-लेवल बैठक: राहुल गांधी ने CIC, ICs की नियुक्ति पर दर्ज कराई कड़ी ‘असहमति’

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में हुई 88 मिनट की लंबी बैठक ने संसद के गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया। यह बैठक मुख्य सूचना आयुक्त (CIC), आठ सूचना आयुक्तों (ICs) और एक सतर्कता आयुक्त (VC) की महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर विचार करने के लिए बुलाई गई थी। इस उच्च-स्तरीय चयन समिति में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (प्रधानमंत्री द्वारा नामित मंत्री) और विपक्ष के नेता राहुल गांधी शामिल थे।  

सूत्रों के अनुसार, बैठक का एजेंडा सिर्फ मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं था, बल्कि केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) में खाली पड़े आठ सूचना आयुक्तों के पद और एक सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति पर भी विस्तृत चर्चा हुई।  

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राहुल गांधी ने उठाया “प्रतिनिधित्व” का मुद्दा
बैठक खत्म होने के बाद सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने सभी प्रस्तावित नियुक्तियों पर अपनी कड़ी आपत्ति (Dissent Note) दर्ज कराई है और इसे लिखित रूप में चयन समिति को सौंपा है। उनकी असहमति का मुख्य आधार चयन प्रक्रिया में सामाजिक प्रतिनिधित्व की कमी और चयन मानदंडों को लेकर असंतोष था।  

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि देश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी वाले समुदायों जैसे दलित, आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और अल्पसंख्यक का पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ी इन महत्वपूर्ण संस्थाओं में लगभग पूर्ण अभाव है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि गांधी ने इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का जातिवार डेटा मांगा था। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, केवल 7 प्रतिशत से कम आवेदक ही इन ‘बहुजन’ समुदायों से थे, और शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में इनका प्रतिनिधित्व नगण्य था। राहुल गांधी ने तर्क दिया कि यह स्थिति देश के समावेशी लोकतंत्र के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है और हाशिए पर पड़े समूहों को जवाबदेही सुनिश्चित करने वाले निकायों में प्रवेश करने से रोकती है।

CIC में 8 पद खाली, लंबित मामलों का अंबार
नियुक्तियों में देरी के कारण केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) इस समय गंभीर संकट का सामना कर रहा है। सितंबर में पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद खाली है। आयोग में कुल 10 सूचना आयुक्तों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो सूचना आयुक्त आनंदी रामलिंगम और विनोद कुमार तिवारी ही काम संभाल रहे हैं।  

आयोग की वेबसाइट के अनुसार, इस समय CIC के पास 30,838 अपीलें और शिकायतें लंबित हैं। बड़ी संख्या में रिक्त पदों और भारी कार्यभार के कारण आरटीआई आवेदकों के मामलों के निपटारे में अभूतपूर्व देरी हो रही है, जिससे नागरिकों के सूचना के अधिकार पर सीधा असर पड़ रहा है।  

सरकार की ओर से अधिकारियों ने संकेत दिया है कि चयन प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है और जल्द ही इन पदों पर अंतिम नियुक्तियों की घोषणा होने की उम्मीद है। हालांकि, विपक्ष की आपत्ति के बाद अब यह देखना होगा कि चयन समिति अंतिम सूची में क्या बदलाव करती है। आरटीआई अधिनियम की धारा 12(3) के तहत, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति ही इन नियुक्तियों के लिए नामों की सिफारिश करती है।

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