पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, बोले— “भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि, बातचीत से निकले समाधान”

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार बड़ा सार्वजनिक ऐलान किया है। सोमवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर देश और दुनिया को एक मजबूत संदेश दिया।

कूटनीति और संवाद पर भारत का जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति को “गंभीर और चिंताजनक” बताते हुए स्पष्ट किया कि भारत किसी भी तरह के युद्ध या हिंसा के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा, “भारत हमेशा से ही टकराव के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का प्रबल समर्थक रहा है। मौजूदा हालात में हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।” पीएम मोदी ने यह भी बताया कि भारत इस संकट को टालने के लिए क्षेत्रीय देशों के साथ निरंतर संपर्क में है।

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युद्ध क्षेत्र में फंसे 90 लाख भारतीय: सरकार अलर्ट
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत सरकार इजरायल, ईरान और अन्य खाड़ी देशों के साथ मिलकर काम कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे क्षेत्र में भारत के लिए बड़ी जिम्मेदारी है:

ईरान: लगभग 10,000 भारतीय छात्र और कामकाजी लोग।

इजरायल: 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक।

पूरा पश्चिम एशिया: लगभग 90 लाख भारतीय रोजगार और व्यवसाय के लिए वहां बसे हुए हैं।

पीएम मोदी ने हाल ही में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी फोन पर बातचीत कर दुश्मनी को तुरंत समाप्त करने और शांति बहाली पर जोर दिया था।

दूतावासों को निर्देश: ‘सुरक्षित वापसी’ की तैयारी
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस मुद्दे पर जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों को हाई अलर्ट पर रखा है। सीनियर अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने (इवेक्यूएशन) की योजना पर भी चर्चा की जा चुकी है। दूतावासों को निर्देश दिया गया है कि वे हर भारतीय नागरिक के संपर्क में रहें।

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां रह रहे विशाल प्रवासी समुदाय पर पड़ता है। पीएम मोदी का यह बयान न केवल वैश्विक शांति की अपील है, बल्कि युद्ध क्षेत्र में फंसे लाखों भारतीयों के परिवारों के लिए एक बड़ा आश्वासन भी है। भारत ने एक बार फिर दुनिया को संदेश दिया है कि समस्याओं का अंत युद्ध नहीं, बल्कि सार्थक संवाद है।

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