सिटी पोस्ट लाइव
गया जिले की दस विधानसभा सीटों में आधे से अधिक सीटों पर नेताओं के पुत्र-पुत्रियों के चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा ने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है। मंत्री, सांसद और विधायक अपने रिश्तेदारों को स्थापित करने की कोशिश में जुट गए हैं। हम पार्टी प्रमुख व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पहले से ही अपनी पार्टी को पारिवारिक राजनीति का रंग दे चुके हैं। उनके पुत्र मंत्री, पुत्रवधू विधायक और परिवार के अन्य सदस्य राजनीतिक पदों पर काबिज हैं। अब 2025 के चुनाव को देखते हुए मांझी ने कुछ और सीटों पर दावा जताया है, जिनमें पुत्र और पुत्री के लिए जगह बनाने की चर्चा है।
वहीं, राजद सांसद डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद यादव का परिवार भी सक्रिय है। बेलागंज विधानसभा उपचुनाव में उनके पुत्र विश्वनाथ प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया था, हालांकि वे जदयू की मनोरमा देवी से हार गए थे। अब मनोरमा देवी के पुत्र राकेश रंजन उर्फ रॉकी यादव राजनीति में सक्रिय दिख रहे हैं और स्थानीय समर्थन भी जुटा रहे हैं। दरअसल, गयाजी शहरी सीट से लंबे समय से विधायक और मंत्री रहे डॉ. प्रेम कुमार अपने बेटे सागर कुमार को राजनीति में उतारने की तैयारी में हैं। सागर अपने पिता के साथ लगातार कार्यक्रमों में देखे जा रहे हैं और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रियता बढ़ा रहे हैं। उधर, वजीरगंज सीट से पूर्व कांग्रेस विधायक अवधेश कुमार सिंह के पुत्र डॉ. शशि शेखर भी दोबारा चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले चुनाव में किस्मत आजमा चुके शशि शेखर को पिता का मजबूत समर्थन हासिल है।
हालांकि, जिले की राजनीति में पारिवारिक दखल से कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ता दिख रहा है। कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मानते हैं कि टिकट वितरण में योग्य और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर नेताओं के बेटा-बेटी को तरजीह दी जा रही है। आने वाले विधानसभा चुनाव में गया की तस्वीर साफ कर देगी कि पारिवारिक राजनीति हावी होती है या पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत को तरजीह मिलती है।