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जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने मुजफ्फरपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंगल पांडे और अशोक चौधरी पर तीखे हमले किए। उन्होंने मुजफ्फरपुर रेप केस को लेकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अगर पांडे यह नहीं बता सकते कि पीड़िता को समय पर चिकित्सीय सुविधाएं क्यों नहीं मिलीं, तो उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
प्रशांत किशोर ने कहा, “मुजफ्फरपुर के कुढ़नी में दलित नाबालिग लड़की के साथ हुई यह वीभत्स घटना अत्यंत दुखद है। इसके बाद पीएमसीएच की लापरवाही से उसकी मौत हुई, और इसके लिए पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे की है। यदि वे यह स्पष्ट नहीं कर सकते कि पीड़िता को समय पर इलाज क्यों नहीं मिला, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।”
अशोक चौधरी पर आरोप
प्रशांत किशोर ने जदयू नेता अशोक चौधरी और उनकी पत्नी शांभवी चौधरी द्वारा उनकी आलोचना पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, “हमारी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, लेकिन हमारी लड़ाई उस सोच से है जिसमें चंद परिवार ही राजनीति में बने रहते हैं। अशोक चौधरी ने कहा कि उनका परिवार मेरी उम्र से ज्यादा समय से राजनीति में है, जो सही है। लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि अगर उनका परिवार तीन पीढ़ियों से राजनीति कर रहा है तो उन्होंने दलित बच्चों की शिक्षा के लिए क्या किया है? आज भी केवल 3% दलित बच्चे ही 12वीं पास कर पाते हैं।”
राहुल गांधी को चुनौती
प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी को भी खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा, “अगर राहुल गांधी में हिम्मत है तो वह लालू यादव द्वारा बाबा साहब अंबेडकर के चित्र के आगे पैर रखने का विरोध करें। राहुल गांधी को हर जगह ‘डरो मत’ का संदेश देते देखा जाता है, तो हम भी उनसे कहते हैं कि ‘लालू जी से मत डरो’ और आकर उनका विरोध करो।”
जन सुराज की ताकत और आगामी चुनाव
प्रशांत किशोर ने अपने संगठन जन सुराज की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर 2024 को जन सुराज एक पार्टी के रूप में अस्तित्व में आएगा, और महज 5-6 महीने में यह पार्टी बिहार में सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन जाएगी। उन्होंने कहा, “हमारे संगठन को एक करोड़ लोगों ने समर्थन दिया है और हर महीने 3 से 4 लाख लोग पार्टी के सदस्य बन रहे हैं।”
इसके अलावा, उन्होंने बिहार बदलाव यात्रा के उद्देश्य पर भी बात की, जिसका मुख्य उद्देश्य बिहार में व्यवस्था परिवर्तन और जनता को जागरूक करना है। “हमारी यात्रा की शुरुआत 20 मई को जेपी की जन्मभूमि सिताब दियारा से हुई थी, और अब हम बिहार के हर कोने में व्यवस्था परिवर्तन का संदेश दे रहे हैं,” उन्होंने कहा।