चिराग पासवान की नाराजगी के बीच प्रशांत किशोर की एंट्री से NDA में हड़कंप! 40 सीटों की मांग पर अड़ी लोजपा

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है। निर्वाचन आयोग ने दो चरणों में मतदान की तारीखों का ऐलान कर दिया है—पहला चरण 6 नवंबर को 121 सीटों पर और दूसरा चरण 11 नवंबर को बाकी 122 सीटों पर। 14 नवंबर को नतीजे घोषित होंगे। कुल 243 सीटों वाली इस सभा में बहुमत के लिए 122 का जादुई आंकड़ा हासिल करना होगा। लेकिन चुनावी सरगर्मी के बीच एक नया राजनीतिक ट्विस्ट सामने आ रहा है—लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान और पूर्व चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं। लोजपा के सूत्रों के हवाले से एनडीटीवी की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की गई है, जिससे एनडीए में खलबली मच गई है।

चिराग पासवान, जो वर्तमान में एनडीए के हिस्से के रूप में केंद्र में मंत्री हैं, अपनी पार्टी के लिए बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 40 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं, भाजपा केवल 25 सीटें देने को तैयार है। 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग ने अकेले 137 सीटों पर दांव लगाया था, लेकिन केवल एक सीट जीती। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में लोजपा ने 5 सीटों पर शानदार प्रदर्शन किया और सभी पर जीत हासिल की। इस बार एनडीए में रहते हुए भी चिराग ‘सम्मानजनक’ हिस्सेदारी चाहते हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रशांत किशोर के साथ गठबंधन की महज चर्चा से ही भाजपा पर दबाव बढ़ गया है। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति में एक अनोखा प्रयोग होगा, क्योंकि दोनों ही दल पहली बार सभी 243 सीटों पर फोकस कर रहे हैं।

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प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी गठबंधन में नहीं पड़ेगी और सभी 243 सीटों पर स्वतंत्र रूप से लड़ेगी। किशोर ने अपनी पार्टी की लॉन्चिंग के समय ही अमेरिकी प्राइमरी सिस्टम से उम्मीदवार चयन, विधायकों को रिकॉल करने का अधिकार और 90 प्रतिशत नए चेहरों को टिकट देने का वादा किया था। फिर भी, लोजपा सूत्रों का दावा है कि चिराग और किशोर के बीच बातचीत चल रही है। यह गठबंधन यदि हकीकत बनता है, तो एनडीए के साथ-साथ विपक्षी महागठबंधन को भी चुनौती दे सकता है। जानकारों का मानना है कि चिराग की मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षा को मजबूती मिल सकती है, लेकिन प्रशांत किशोर की पहली चुनावी पारी होने से यह जोखिम भरा दांव होगा।

इधर, एनडीए में सीट बंटवारे की चर्चा तेज है। भाजपा और जदयू के बीच 205 सीटों को बराबर बांटने पर सहमति बन रही है—लगभग 100-100 सीटें। बाकी 38 सीटें लोजपा (25), हम (7) और रालोसपा (6) के बीच बंटेंगी। लेकिन चिराग ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी का सीट बंटवारा भाजपा के साथ होगा, न कि जदयू के साथ। इससे जदयू और लोजपा के बीच तनाव साफ झलक रहा है। लोजपा ने उन खबरों का खंडन भी किया है कि भाजपा-जदयू ने 200 सीटें आपस में बांट ली हैं।


चुनाव से ठीक पहले चिराग पासवान की भाजपा नेताओं से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, बिहार भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े और राज्य मंत्री मंगल पांडेय ने चिराग के दिल्ली स्थित निवास पर जाकर सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर चर्चा की। तावड़े ने खुद एक्स (पूर्व ट्विटर) पर ये तस्वीरें शेयर कीं, जिसमें चिराग के साथ गहन बातचीत का अंदाजा हो रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तावड़े ने ट्वीट में लिखा, “एनडीए की एकजुटता बिहार की प्रगति का आधार है।”

बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण हमेशा अहम रहे हैं। चिराग पासवान पासवान समुदाय (लगभग 9 प्रतिशत) के वोट बैंक पर निर्भर हैं, जबकि प्रशांत किशोर विकास और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं। विपक्ष में तेजस्वी यादव की आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों का महागठबंधन भी सीट बंटवारे में उलझा है। आरजेडी 125 सीटों पर दावा कर रही है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम सीमांचल में प्रभाव डाल सकती है। एनडीए का दावा है कि वह 225 से ज्यादा सीटें जीतेगा, जबकि चिराग ने कहा, “यह हमारा बिहार है।”

सुबह ही लोजपा ने एक्स पर ‘अबकी बार, युवा बिहारी’ पोस्टर शेयर किया, जो चिराग की युवा अपील को रेखांकित करता है। क्या यह गठबंधन हकीकत बनेगा या महज दबाव बनाने की रणनीति? बिहार के सियासी घमासान में यह सवाल अब प्रमुख है। चुनावी मैदान में नितीश कुमार, तेजस्वी यादव, चिराग पासवान और प्रशांत किशोर जैसे चेहरे आमने-सामने होंगे। बिहार के 7.3 करोड़ मतदाता तय करेंगे कि राज्य का भविष्य किसका होगा।

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