पहलगाम नरसंहार पर कन्हैया ने ऐसा क्याकहा कि हज़ारों लोगों में छिड़ गई बहस!

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
पटना : पहलगाम नरसंहार के बाद बीजेपी की ओर से यह पोस्ट जारी किए जाने कि आतंकियों ने मारने से पहले धर्म पूछा, जाति नहीं, एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला है। अखिलेश यादव और कन्हैया कुमार ने कहा है बीजेपी इस आतंकी हमले का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है, जो बेहद घृणित काम है। कन्हैया कुमार ने कहा है कि यह देखना बेहद तकलीफ़देह है कि जब पहलगाम के घिनौने आतंकी हमले से पूरा देश शोक में डूबा है तब कुछ लोग इस आपदा में अवसर को तलाशते हुए धर्म और पहचान की आड़ में नफ़रत, ऊँच-नीच, भेदभाव, जातिवाद, असमानता, अन्याय और लोगों को आपस में लड़ाने की राजनीति को जायज़ ठहरा रहे हैं। कन्हैया कुमार ने कहा है कि मैंने बड़ी कोशिश की। इस कायराना आतंकी हमले पर लोगों की सुरक्षा और शांति के अलावा सरकार से केवल दोषियों को सख़्त सजा और आम लोगों को न्याय की अपील के सिवा कुछ नहीं बोलूँगा लेकिन बेहद शर्म और दुःख से कुछ सवाल पूछने पड़ रहे हैं।ये हमारे देश और समाज के अपने लोग हैं जो आपदा में अवसर को अपने जीवन का मूल मंत्र बना चुके हैं? ये हमारे ही लोग हैं, जो हमारे ही बीच रहते हैं, वो एक घिनौने अपराध को दूसरे जघन्य अपराध से जायज ठहरा रहे हैं? मज़हब और धर्म के नाम पर आतंकवाद हो या जन्म के नाम पर जातिवाद का उन्माद- ये दोनों ही मानवता, समानता, न्याय और एकता के दुश्मन हैं।

माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स पर पोस्ट कर कन्हैया कुमार ने कहा है कि लोकतंत्र, संविधान और न्याय-व्यवस्था को अपराधी बता रहे हैं। सरकार की बजाय विपक्ष से सवाल पूछ रहे हैं। देश के वर्तमान प्रधानमंत्री की जगह पहले प्रधानमंत्री नेहरू जी को दोषी ठहरा रहे हैं। चाइना और पाकिस्तान से सवाल पूछने की जगह देश के अपने ही लोगों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। एक कट्टरता की आड़ में दूसरी कट्टरता को सही ठहरा रहे हैं। कन्हैया कुमार ने कहा है कि सही मायने में सवाल या तो आतंकवाद से होगा या इससे देश को सुरक्षित रखने की जिम्मेवारी वाले पदों पर बैठे लोगों से। जो लोग जान बूझकर ग़लत सवाल उठा रहे हैं, इन लोगों से बस इतना ही कहना है कि ‘देशभक्ति’ असल में सरकारी चापलूसी से बहुत ज़्यादा श्रेष्ठ और स्वाभिमान की भावना है और ‘देशप्रेम’ को समझना तो एक कठिन साधना है। जिसको भी देशभक्ति और देशप्रेम हासिल है वो कभी भी नफ़रत और उन्माद के पोषक नहीं हो सकते। कन्हैया कुमार ने कहा है कि हमारे देश में जो नफ़रत का खेल जारी है यही असल में हिंसा, डर, आतंक और नरसंहार को जन्म देती है। हर इंसान को यह याद रखने और बार-बार दोहराने की जरूरत है कि इंसान से इंसान के बीच नफ़रत, हिंसा, असमानता और भेदभाव असल में इंसानियत और मानवता के दुश्मन हैं। यही डर, लोभ और घृणा को जन्म देता है। अगर हम सचमुच आतंकवाद को हराना चाहते हैं तो हमको डर और नफ़रत को हराना होगा। कन्हैया कुमार ने कहा है कि देश में प्यार, बराबरी, न्याय और शांति चाहने वाले लोगों से यही उम्मीद है कि ऐसे नाज़ुक वक़्त में हम संवेदना, साहस और सावधानी से रहेंगे और ऐसे लोग, दल या विचार जो नफ़रत, हिंसा, अन्याय और आतंक को बढ़ावा दे रहे हों उनका डटकर मुक़ाबला करेगें। जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा है कि तमाम असहमतियों के बावजूद आतंकवाद के विषय पर सरकार से यह उम्मीद है कि वो राजनीतिक और चुनावी उद्देश्यों को भूलकर देश में अमन, शांति, न्याय और तरक्की के दुश्मनों का, आतंक और आतंकी का, हर उस सोच का जो देश में संविधान के ख़िलाफ़ है और जो अन्याय को जायज़ ठहराता हो उसका सही निदान करेगी। आतंक के ख़िलाफ़ पूरी मानवता एकजुट खड़ी है और न्याय की उम्मीद में है।इस बीभत्स आतंकी घटना में अगर किसी का सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ है तो वो है- मानवता, प्रेम, न्याय, सुख, शांति, मुश्किलों से भरी ज़िन्दगी में सुकून के दो पल की उम्मीद और देश के आमलोगों के विश्वास का। जिन लोगों ने अपनों को खोया है उस परिवार के असीम दुःख की कल्पना भी भयावह है। इन मुश्किल परिस्थितियों में भी यह उम्मीद क़ायम है कि यह कठिन दौर भी बीतेगा नफ़रत, भेदभाव, हिंसा, अन्याय, अपराध, असमानता और आतंक की हार होगी और मानवता की जय होगी। कन्हैया ने कहा कि पूरा देश इस शोक की घड़ी में उस परिवार के साथ एक परिवार की तरह खड़ा है जिन्होंने अपनों को खोया है। कन्हैया कुमार के इस पोस्ट के बाद कई यूजर्स ने उन्हें देशद्रोही और पाकिस्तान समर्थक बताया है, तो कई ने उनका समर्थन भी किया है, लेकिन उनके पोस्ट पर हज़ारों लोगों ने कॉमेंट कर समर्थन या निंदा करते हुए अपने विचार जताए हैं।

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