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चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। उन्होंने हाल ही में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA), चुनाव आयोग और विपक्षी इंडिया गठबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। किशोर ने विशेष मतदाता पुनरीक्षण की आवश्यकता, घुसपैठियों के मुद्दे और बिहार बंद के औचित्य पर तीखे सवाल उठाए हैं।
चुनाव आयोग पर ‘अशुद्ध मतदाता सूची’ का आरोप
प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग के विशेष मतदाता पुनरीक्षण (Special Revision of Electoral Rolls) के फैसले पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “विशेष पुनरीक्षण की ज़रूरत नहीं है।” उनके अनुसार, केवल मृतकों के नाम हटाए जाने चाहिए और 1 जनवरी 2025 तक 18 वर्ष पूर्ण करने वाले युवाओं के नाम जोड़े जाने चाहिए। इससे अधिक किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है।
किशोर ने घुसपैठियों के मुद्दे को लेकर भी चुनाव आयोग और NDA सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “अगर कोई कह रहा है कि संशोधन इसलिए होना चाहिए कि कोई बाहर का आदमी आ गया है, कोई घुसपैठिया आ गया है, तो पिछले एक साल से बिहार में NDA (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस) की सरकार है। तो क्या ये स्वीकार कर रहे हैं कि NDA के रहते हुए घुसपैठिए बाहर से आकर यहाँ बिहार में रह रहे हैं?” उन्होंने इसे NDA की “हराकिरी” (आत्मघाती कदम) बताया कि चुनाव से ठीक दो महीने पहले इलेक्शन कमीशन मतदाता रोल बनाने की बात कर रहा है।
उन्होंने बिहार के बाहर मजदूरी कर रहे लाखों युवाओं की परेशानी पर भी चिंता जताई। “पचास लाख से ज्यादा लड़के बिहार के युवा जो बाहर मज़दूरी करते हैं, रोज़ी-रोज़गार करते हैं, वो तो दिवाली-छठ में आएंगे। वो कैसे फॉर्म भरेंगे? जो मज़दूरी कर रहा है, वो कहां से अपने काम को छोड़कर आएगा फॉर्म भरने के लिए?” किशोर ने इस कदम का पुरजोर विरोध किया।
सबसे बड़ा आरोप लगाते हुए किशोर ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या वह यह मान रहा है कि 2024 का लोकसभा चुनाव “अशुद्ध मतदाता सूची” के साथ हुआ था? उन्होंने सवाल किया, “क्या इस देश के प्रधानमंत्री का चुनाव अशुद्ध मतदाता सूची के साथ किया गया है? पहले इलेक्शन कमीशन ये स्वीकार करे कि 2024 का जो मतदाता सूची था, वो शुद्ध नहीं था।” उनका तर्क है कि यदि अब मतदाता सूची को शुद्ध किया जा रहा है, तो इसका सीधा अर्थ है कि पिछला चुनाव अशुद्ध सूची से हुआ था।
NDA पर ‘घुसपैठियों’ को लेकर सवाल
NDA पर हमला करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “सरकार तुम चला रहे हो तो घुसपैठियों को नहीं पकड़ा, तो घुसपैठियों को क्या बीजेपी वाले बिहार में लेकर आए?” उन्होंने यह भी पूछा कि जो 50 लाख बच्चे बिहार के बाहर मज़दूरी कर रहे हैं, क्या वे बिहार के लिए घुसपैठिये हैं और क्या उन्हें मत का अधिकार नहीं मिलना चाहिए?
इंडिया गठबंधन के ‘बिहार बंद’ का विरोध
इंडिया गठबंधन के बिहार बंद पर भी प्रशांत किशोर ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह “इसके वैचारिक तौर पर विरोध करते हैं।” किशोर के अनुसार, “बंद-हड़ताल से सिर्फ जनता का नुक्सान होता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बंद में “लम्पट एलिमेंट” (शरारती तत्व) सड़कों पर आगजनी करते हैं और घेर कर खड़े हो जाते हैं, जिससे आम इंसान, दुकानदार, टेम्पो ड्राइवर और रिक्शा चलाने वालों की रोज़मर्रा की आमदनी प्रभावित होती है।
किशोर ने इंडिया गठबंधन को सलाह दी कि अगर उन्हें धरना प्रदर्शन करना ही है, तो चुनाव आयोग के दफ्तर जाकर करें। “नेता तो पटना में बैठा हुआ है। अगर आप धरना प्रदर्शन ही करना चाहते हैं तो जाकर चुनाव आयोग के जाकर धरना प्रदर्शन कीजिए। आपके पास 75 MLA हैं, जाकर चुनाव आयोग को घेरो। बिहार के सुदूर एरिया में जाकर लोगों का दुकान क्यों बंद करवाते हो? इससे क्या चुनाव आयोग पे दबाव बनेगा?”
प्रशांत किशोर के इन बयानों से बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में और गरमाहट देखने को मिल सकती है, क्योंकि उन्होंने सभी प्रमुख राजनीतिक खिलाड़ियों पर सीधा हमला बोला है।