पश्चिम चंपारण के भितिहरवा स्थित गांधी आश्रम में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर बुधवार सुबह 11 बजे से एक दिन के मौन उपवास पर बैठे हैं। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती सहित संगठन के कई पदाधिकारी, सभी विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिससे कार्यक्रम का माहौल राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो गया।

चुनाव में उम्मीद के अनुरूप समर्थन न मिलने पर प्रशांत किशोर ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी खुद पर लेते हुए मौन उपवास का विकल्प चुना है। वे इसे राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि आत्ममंथन और प्रायश्चित की प्रक्रिया बताते हैं। सोमवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि तीन वर्षों की मेहनत के बाद भी यदि जनसंदेश उतनी प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पाया, तो नेतृत्व को स्वयं का मूल्यांकन करना चाहिए। उनके मुताबिक, यह उपवास जनता के प्रति जवाबदेही का प्रतीक है, न कि किसी तरह का शक्ति प्रदर्शन। वहीं, उपवास स्थल के रूप में भितिहरवा गांधी आश्रम का चयन भी खास मायने रखता है। यही वह स्थान है जहां महात्मा गांधी ने सत्य, आत्मशुद्धि और सेवा के आधार पर परिवर्तन का संदेश दिया था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में पीके अपनी राजनीतिक यात्रा का नया आत्मनिरीक्षण शुरू कर रहे हैं।

जन सुराज के वरिष्ठ पदाधिकारी, जिला अध्यक्षों और कई विधानसभा प्रत्याशियों की मौजूदगी इस कार्यक्रम को संगठनात्मक रूप से भी खास बना रही है। आश्रम परिसर में तैयारी पूरी है और प्रशासनिक हलचल भी जारी है। पार्टी का कहना है कि यह मौन उपवास सिर्फ चुनावी समीक्षा भर नहीं, बल्कि जन सुराज की आगे की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव है। शांत वातावरण में हो रहा यह आत्मचिंतन अभियान प्रशांत किशोर और पूरी टीम के लिए आने वाली राजनीतिक यात्रा का नया प्रारंभ माना जा रहा है।