प्रचार की चमक, खर्च की छूट: स्टार प्रचारकों का अनसुना फायदा…

Ritu Raj

बिहार विधानसभा चुनावों की सरगर्मी में राजनीतिक दलों की नजरें अपने स्टार प्रचारकों पर टिकी हैं। ये दिग्गज नेता मतदाताओं के दिलों पर राज करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक दल के पास कितने स्टार प्रचारक होते हैं और क्या इन्हें प्रचार के लिए अलग से पैसे मिलते हैं?

भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) स्टार प्रचारकों की संख्या पर कड़ी नजर रखता है, ताकि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को अधिकतम 40 स्टार प्रचारक रखने की छूट है, जबकि गैर-मान्यता प्राप्त दलों के लिए यह संख्या 20 तक सीमित है। यह नियम सभी को समान अवसर देता है और किसी भी दल को असीमित प्रचारकों की फौज खड़ी करने से रोकता है। दरअसल, पार्टी को चुनाव अधिसूचना जारी होने के 7 दिनों के अंदर इन स्टार प्रचारकों की पूरी सूची चुनाव आयोग को जमा करनी पड़ती है। एक बार सूची स्वीकृत हो जाने के बाद, कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। अगर कोई दल सूची में नाम जोड़ना या हटाना चाहता है, तो उसे आयोग की विशेष अनुमति लेनी होगी। इन दिग्गजों को प्रचार के लिए कोई व्यक्तिगत वेतन या भत्ते नहीं दिए जाते। सभी स्टार प्रचारक स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा के चलते मैदान में उतरते हैं। उनके यात्रा, रहने और अन्य लॉजिस्टिक खर्च पूरी तरह राजनीतिक दल के खाते में आते हैं, न कि किसी उम्मीदवार के व्यक्तिगत चुनावी खर्च में।

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हालांकि, इसमें कुछ महत्वपूर्ण अपवाद हैं:
– अगर कोई स्टार प्रचारक किसी खास उम्मीदवार के लिए विशेष रूप से प्रचार करता है या उसके साथ मंच साझा करता है, तो संबंधित खर्च उस उम्मीदवार के चुनावी खाते में जोड़ा जाता है।
– यदि स्टार प्रचारक स्वयं उम्मीदवार है और अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार कर रहा है, तो सभी खर्च उसके व्यक्तिगत खाते में गिने जाते हैं।

गौरतलब है कि चुनाव प्रचार में स्टार प्रचारक का महत्व बढ़ता जा रहा है। ये सिर्फ राजनीतिक हस्तियाँ नहीं होते, बल्कि एक प्रकार की रणनीतिक संपत्ति होते हैं, जिनका प्रभाव पार्टी के चुनावी परिणामों पर गहरा होता है। हालांकि, इन स्टार प्रचारकों की स्थिति चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित आचार संहिता से बंधी होती है, और उनका किसी भी तरह का उल्लंघन उनकी स्थिति के रद्द होने का कारण बन सकता है। वहीं, आयोग ने स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल होने के लिए कुछ नियम तय किए हैं। यदि किसी स्टार प्रचारक ने पार्टी की नीति या चुनाव आयोग के आदेशों का उल्लंघन किया, तो उनकी प्रचारक भूमिका समाप्त हो सकती है। इसके अलावा, चुनाव आयोग केवल मृत्यु या पार्टी छोड़ने के मामले में ही स्टार प्रचारक की सूची में बदलाव की अनुमति देता है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई सदस्य पार्टी छोड़ता है या कोई स्टार प्रचारक चुनाव प्रचार के दौरान अस्वस्थता के कारण प्रचार नहीं कर सकता, तो केवल उन्हीं परिस्थितियों में सूची में बदलाव किया जा सकता है।

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