राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला: बिहार में सियासी रणनीति या हार की आशंका?

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक दलों की रणनीतियों ने रफ्तार पकड़ ली है। इस सियासी सरगर्मी के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बड़ा और विवादास्पद बयान देकर हलचल मचा दी है। राहुल ने सीधे चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र में कथित चुनावी धांधली का आरोप लगाया है और आशंका जताई है कि यही ‘ब्लूप्रिंट’ बिहार में भी अपनाया जा सकता है।

क्या है राहुल गांधी का आरोप?

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि महाराष्ट्र में 2019 से 2024 के बीच मतदाता संख्या में 31 लाख की वृद्धि हुई थी, लेकिन केवल मई 2024 से नवंबर 2024 के बीच 41 लाख नए मतदाता अचानक सूची में जुड़ गए। उन्होंने इस वृद्धि को ‘फर्जी मतदाता जोड़ने’ की साजिश करार देते हुए कहा कि यदि ऐसा ही पैटर्न बिहार में दोहराया गया तो यह लोकतंत्र के लिए खतरा होगा। राहुल ने यह भी सवाल किया कि यदि चुनाव आयोग के पास छिपाने को कुछ नहीं है तो वह उनके सवालों के जवाब क्यों नहीं दे रहा। उन्होंने चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग की और इसे जनता के अधिकारों की रक्षा से जोड़ा।

बीजेपी का पलटवार ‘हार की हताशा में रचा गया फर्जी विमर्श’ राहुल गांधी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी की यह रणनीति एक तयशुदा पटकथा का हिस्सा है। उन्होंने कहा “राहुल गांधी फर्जी विमर्श रचने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वह लगातार चुनावों में हार से निराश हैं। पहले चरण में कांग्रेस अपनी गलतियों के कारण चुनाव हारती है। दूसरे चरण में राहुल आत्मनिरीक्षण के बजाय षड्यंत्र की थ्योरी गढ़ते हैं। तीसरे चरण में तथ्यों की अनदेखी करते हैं और चौथे चरण में बिना सबूत संस्थाओं को बदनाम करने लगते हैं।”

सियासी मायने और महागठबंधन पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान एक राजनीतिक दांव भी हो सकता है, जिसका मकसद एनडीए को बैकफुट पर लाना और महागठबंधन को एकजुट करना है। हालांकि, इसके साथ ही यह कदम जोखिम भरा भी हो सकता है, क्योंकि इससे यह संकेत जा सकता है कि महागठबंधन को पहले से ही हार का डर है। एनडीए नेताओं ने राहुल के बयान को ‘हार मानने की मानसिकता’ बताया है, जबकि महागठबंधन के घटक दलों ने इसे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग बताते हुए समर्थन दिया है। राहुल गांधी का यह बयान आने वाले बिहार चुनाव की राजनीतिक दिशा और विमर्श को प्रभावित कर सकता है। अब देखना यह होगा कि यह दांव जनता को जागरूक कर पाता है या बीजेपी के लिए मौका बन जाता है।

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