दरअसल, आरजेडी कर रही है
सिटी पोस्ट लाइव : एक तरफ तेजस्वी यादव जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘टायर्ड और रिटायर्ड’यानी थका हारा बताते हुए खुद को युवा नेता के तौर पर स्थापित करने में लगे हैं. वहीं, लोकसभा चुनाव और बिहार विधानसभा उपचुनाव में मन मुताबिक नतीजों के नहीं आने के बाद लालू प्रसाद यादव जिले-जिले जाकर राजद के संगठन में नया उत्साह पैदा करने की कवायद कर रहे हैं. जाति-धर्म के आधार पर अपने वोटरों को एकजुट होने का संदेश देने की कोशिश भी शुरू हो गई है. बीते 24 मार्च को जहां लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी ने दावते इफ्तार दी और तमाम मुस्लिम संगठनों को अपने यहां आमंत्रित कर मुस्लिम समुदाय को एकजुटता का मैसेज देने की कोशिश की.‘
अब आरजेडी आगामी 8 अप्रैल को जाति आधारित रैली की भी वह शुरुआत करने जा रही है. पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल में मुसहर भुईयां महारैली सह संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. भुईयां मुसहर महारैली का उद्घाटन राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव करेंगे और मुख्य अतिथि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव रहेंगे. हजारों की संख्या में मुसहर समाज के लोग इस रैली में शामिल होंगे और एकता का परिचय देते हुए राजद के साथ जुड़ने का आह्वान करेंगे. दरअसल, छोटी-छोटी जाति समूहों को अपने पाले में करने की कवायद की यह राजद की रणनीति है.
बीते लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने कुशवाहा समाज में सेंधमारी करने में कामयाब रहा था.तेजस्वी यादव नीतीश कुमार के कोर वोट बैंक को आरजेडी के पाले में लाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.उन्हें लगता है कि अगर कुशवाहा जैसी जाति में वह फूट डालने में कामायाबी मिल सकती है तो जीतन राम मांझी की दावेदारी वाली मुसहर भुईयां समाज में भी बिखराव लाने में सफलता मिल सकती है.. राजनीति के जानकार बताते हैं कि राष्ट्रीय जनता दल को यह यकीन है कि 14% से अधिक यादव जाति के और 18% करीब मुस्लिम वोटर इंटैक्ट रहे तो उनके लिए 32% का वोट बैंक तो पक्का है. अब इसमें छोटी-छोटी जातियों का समूह जुड़ता चला जाए तो यह वोट प्रतिशत भी बढ़ता चला जाएगा. इस क्रम में 4.27% वाली कुशवाहा जाति पर जहां राजद की नजर है, वहीं मुसहर जाति पर भी वह डोरे डालने में लगी है.