बिहार की राजनीति में एक बार फिर अमरेंद्र धारी सिंह (AD सिंह) का नाम चर्चा के केंद्र में है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने उन पर दोबारा भरोसा जताते हुए उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। गुरुवार को नामांकन के साथ ही उन्होंने चुनावी जंग को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

कौन हैं अमरेंद्र धारी सिंह?
पटना जिले के विक्रम के रहने वाले अमरेंद्र धारी सिंह कोई साधारण नाम नहीं हैं। वे एक दिग्गज व्यवसायी और बड़े जमींदार के रूप में पहचाने जाते हैं। उनके बारे में कुछ प्रमुख बातें:
अथाह संपत्ति: वे 200 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक हैं। पटना के पालीगंज स्थित अंइखन गांव में उनके पास लगभग एक हजार बीघा जमीन है।
ग्लोबल बिजनेस: रियल एस्टेट के साथ-साथ दुनिया के 13 देशों में उनका फर्टिलाइजर और केमिकल इम्पोर्ट का कारोबार फैला हुआ है।
हाई-प्रोफाइल नेटवर्क: दिल्ली के पॉश गोल्फ क्लब के सदस्य हैं, जहाँ बिहार से सिर्फ किंग महेंद्र और रविशंकर प्रसाद जैसे दिग्गज ही शामिल हैं। वे अहमद पटेल के भी करीबी माने जाते रहे हैं।
सादगी और सेवा: 55 वर्षीय अमरेंद्र धारी सिंह अविवाहित हैं। वे फिलहाल दिल्ली में गरीबों की सेवा के लिए 200 बेड का अस्पताल भी बनवा रहे हैं।
लालू यादव की रणनीति: ‘एक तीर से दो शिकार’
अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारकर लालू यादव ने एक सोची-समझी राजनीतिक चाल चली है:
सवर्ण वोटरों को संदेश: पार्टी से छिटके हुए अगड़ी जाति के मतदाताओं को गोलबंद करने की कोशिश।
कांग्रेस को चुनौती: कांग्रेस के पास जो ‘अगड़ी जाति की राजनीति’ का तमगा था, उसे छीनकर आरजेडी ने अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया है।
क्या जीत का समीकरण बिठा पाएंगे ‘AD सिंह’?
इस बार की राह आसान नहीं है। राज्यसभा की 5 सीटों में से 4 पर JDU और BJP का पलड़ा भारी है। असली पेंच पांचवीं सीट पर फंसा है, जिसके लिए तेजस्वी यादव को 6 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत है। हालांकि, महागठबंधन के पास बहुमत से 6 सीटें कम हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अमरेंद्र धारी सिंह अपने रसूख और संसाधनों के दम पर इन जरूरी विधायकों का ‘जुगाड़’ कर सकते हैं।